words per minute

7

ankitkhare1518897


00:00

Speed

ाज हमारे देश में मैकाले की शिक्षा-पद्धति लागू है। मैकाले की शिक्षा-पद्धति सिर्फ शब्‍द ज्ञानियों को जन्‍म देती है। इसमें चरित्र-निर्माण और व्‍यावहारिक-ज्ञान पर तनिक भी ध्‍यान नहीं दिया जाता है। फलत: इस पद्धति से शिक्षित लोग एकाएक जब व्‍यवहार-जगत् में पैर रखते हैं तब वे अपने आपको विकलांग महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, इस शिक्षण-पद्धति से उत्‍पन्‍न शब्‍द ज्ञानी शेक्‍सपियर एवं कालिदास की कृतियों पर घण्‍टों बहस कर सकते हैं, लेकिन उसी वक्‍त अगर बिजली गुल हो जाये तो वे फ्यूज तार नहीं जोड़ सकते। विनोबा जी ने अपने निबन्‍ध जीवन और शिक्षण में इसे ही हनुमान कूद की संज्ञा दी है। एक अनुभवहीन और कमजोर अगर हनुमान की तरह कूदे तो उसे विकलांग होने के सिवा और क्‍या हाथ लगेगा? आज की स्थिति तो और भी बदतर हो गयी है। नौकरी के अभाव में वे शब्‍द ज्ञानी अपने आपको डकैती, आतंकवाद, अपहरण, तस्‍करी आदि घृणित धन्‍धों से जोड़ रहे हैं, फलत: ये समाज के लिए वरदान होकर अभिशप बन रहे हैं। अत: वर्तमान शिक्षा-प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की आवश्‍यकता है। अब शिक्षण-*प्रणाली में शब्‍द ज्ञान के साथ-साथ शिक्षार्थियों के चरित्र-निर्माण एवं उनके व्‍यावहारिक ज्ञान पर विशेष बल देना हेागा, ताकि इस शिक्षण-प्रणाली से प्रशिक्षित व्‍यक्तियों को व्‍यवहार जगत् में आने पर हनुमान-कूद लगाना पड़े। इदसके लिए विनोबाी जी के विचार हैं- शिक्षण नाम के किसी स्‍वतन्‍त्र धन्‍धे की जरूरत नहीं हैै ,न विद्यार्थी नाम के मनुष्‍य-कोटि से बाहर के किसी प्राणाी की। शिक्षा जीवन के क्षेत्र से अपनी चाहिये और शिक्षा का अर्थ जीने की कला होना चाहिये। व्‍यावहारिक शिक्षा-पद्धति में जीवन और शिक्षण साथ-साथ चलते हैं। इसमें शिक्षण के लिए अलग से महाविद्यालय और विश्‍वविद्यालय जाने की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है। उदाहरण के लिए कोई व्‍यवसाय-सम्‍बन्‍धी ज्ञान के लिए अलग से महाविद्यालय और विश्‍वविद्यालय नहीं जाता है, अपितु वह व्‍यवसायी पिता के साथ काम करते हुए व्‍यवसाय-सम्‍बन्‍धी सारा गूढ़ ज्ञान प्राप्‍त कर लेता है। इसी प्रकार, कारखानों में काम करता हुआ व्‍यक्ति भी यान्त्रिक अभियन्‍त्रण में महारत हासिल कर सकता है। साथ ही इस मंजिल तक पहुंचने मेेंं वह परिवार और समाज पर आर्थिक रूप से बोझा नहीं बनता, बल्कि अपना एवं परिवार का बोझ भी साथ-साथ उठाये चलता है। इसी को व्‍यावहारि‍क शिक्षा-पद्धति कहते हैं।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 907 - English

words per minute