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AjayAjay1441230


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त्‍नी घर के काम में व्‍यस्‍त है, पति बाहर से आता है, दरवाजे पर आकर डोर बेल का बटन दबाता है। लेकिन डोर बेल खराब होने के कारण उसकी आवाज पत्‍नी को सुनाई नहीं पड़ती। पति जोर से आवाज कर कहता है मैं हूँ। मैं कौन? पत्‍नी को स्‍पष्‍ट आवाज सुनाई देने के कारण वो पूछती है। पति का क्रोध आसमान पर पहुंच जाता है और कहता है पहले दरवाजा खोल फिर मैं बताता हूँ कि मैं कौन हूँ। पत्‍नी भयभीत हो जाती है और दौड़ती-दौड़ती आकर दरवाजा खोलती है। पति सटाक कर एक थप्‍पड़ उसके गाल पर मारता है, और कहता है अब तुझे समझ आया कि मैं कौन हूं, कौन कहते हुए तुझे शर्म नहीं आई पत्‍नी शांत रही परिस्थिति बिगड़ जाये इसलिए। स्‍वयं की अहंकार की गठरी सिर पर रख कर घूमने वाले पति-पत्नियों की दुनिया में कोई कमी नहीं। सिर्फ पति-पत्‍नी ही क्‍यूं, मित्र, सगे-संबंधी, दफ्तरों में उच्‍च अधिकारी आदि ऐसे ही अहंकार से पीडित रहते हैं। स्‍वयं के महत्‍व को स्‍थापित करने, सम्‍मानित होने के लिए मनुष्‍य को स्‍थापित करने, सम्‍मानित होने के लिए मनुष्‍य स्‍वयं के मैं यानि कि अहंकार को खिला-पिलाकर पुष्‍ट करते हैं।
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