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RaniBillore
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गंगा भारत की पहचान और भारतीयता का जीवंत परिचय है। प्राचीन काल से गंगा दशहरा गंगा के लिए संकल्प और समर्पण का पर्व रहा है। जब हम गंगा तटवासी अपने पूरे परिवार के साथ इस पर्व पर गंगा के कटिपर्यंत जल में खडे होकर गंगा की आराधना करते थे गंगे ममाग्रतो भूया, गंगे में तिष्ठ पृष्ठत: यानी गंगा हमारी समग्र रूप से रक्षा करें। यह गंगा के प्रति मानव की कृतज्ञता के भाव से पूरित प्रार्थना होती थी, लेकिन यह पवित्र भावधारा अब ठिठक सी गई है। किसी नदी को केंद्र मानकर संपूर्ण उत्तर भारत, खासकर जिन पांच राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड, पश्चिम बंगाल से होकर गंगा बहती है, वहां गंगा दशहरा इस नदी के मुक्तिदाता स्वरूप को नमन का पर्व है। कहते हैं कि वैशाख में इसी तिथि को गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ। गंगा दशहरा इसी अवतरण का महोत्सव है।
ठीक 32 साल पहले गंगा एक्शन प्लान का शुभारंभ करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था इस योजना की सफलता सबके सहयोग पर निर्भर होगी। इसलिए योजना को जनांदोलन बनाने की चुनौती है। लेकिन इस योजना के पहले चरण को पूरी तरह सरकारी वित्त पोषित योजना के रूप में क्रियान्वित किए जाने के बाद साल 2000 में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद दूसरे चरण की समाप्ति और आगे की योजना के परिणाम भी सार्थक नहीं रहे। गंगा एक्शन प्लान एक सरकारी कार्यक्रम बनकर रह गया। चार साल पहले इसी मई महीने में गंगा तट पर आयोजित जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था मैं काशी आया नहीं, मुझे गंगा मां ने बुलाया है। गंगा की सफाई और संरक्षण का वादा करते हुए उन्होंने जो शुरूआत की, उस सरकारी कार्यक्रम से आमजन को जोड़ने के प्रयासों का अभी भी इंतजार हो रहा है। गंगा को कानूनी संरक्षण देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सरकारी घोषणा के अनुसार, इस कानून के मसविदे में गंगा में प्रदूषण फैलाने पर कड़े दंड के साथ ही गंगा की जलधारा के संरक्षण और इसके उपयोग के संबंध में भी कानूनी प्रावधान प्रस्तावित हैं। दुनिया भर में नदी कानूनों की एक परंपरा है। अमेरिका में मिसीसिपी व अमेजन नदियों, ब्रिटेन की टेम्स और यूरोप की राइन नदी के संबंध में बने कानून इन नदियों के संरक्षण की दिशा में कारगर रहे हैं। कई देशों में नदियों को जीवित मानव का दर्जा प्राप्त है। हाल ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पीठ ने गंगा को जीवित मानवीय इकाई का कानूनी दर्जा देते हुए एक मामले में गंगा को नोटिस जारी की थी, हालांकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे निरस्त कर दिया। इजरायल में जल को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्राप्त है। भारत में भी गंगा को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की मांग उठी है।