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PRASHANTKUMARRAI
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काला धन अथवा काला बाजार रूपी महादानव भी बडा शक्तिशाली है। आज काले धन वाले की समानान्तर सरकार है। करोडो की हेरा फेरी करने वाले आज आवाद हो रहे है। उनको कोई आंख नहीं दिखा सकता । दो रूपये की चोरी करने वालो पर हावी हो रहे है। ईमानदारी रूपी सोने की लंका जलती जा रही है ऐसी विकराल स्थिति में सबकी बुद्धि पर पत्थर पड गये है। जनता ऐसे सहयोग की आकांक्षा रखती है, जो इस विषम परिस्थिती से देश की रक्षा कर सके। इससे लोहा लेने के लिए भी विद्यार्थी वर्ग ही तत्पर हो सकता है। बडे-बडे कल-कारखाने खोलने से तथा वॉाध बनाने से रार्ष्ट सच्चे अर्थो मे विकास नही कर सकता। हमें आने वाली पीढियों के चरित्र-निर्माण की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। जिस देश में चरित्र वान लोग रहते है, उस देश का सिर गौरव से सदा उठा रहता है। आज के विद्यार्थी को देशभक्ति की भावना से ओत प्रोत होना चाहिए। उसे स्वयं को राष्ट्रीय गौरव का आभूषण बनाये रखना चाहिए। उसे कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिय, जिससे देश के सम्मान को ठेस पहुचती हो। देशभक्ति की उसका लक्ष्य होना चाहिए। अपने जीवन के उत्थान के लिए उसे भौतिकता की ओर उन्मुख न होकर आध्यात्मिकता की ओर उन्मुख होना चाहिए। इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि विश्व के किसी भी क्षेत्र में भौतिक शक्ति आध्यात्मिक शक्ति के सामने ठहर न सकी
जो भरा नही है भावों से, वहती जिसमें रसधार नही। वह हिरदय नही है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नही।