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ManujMishra1495377
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत संग्रहीत राजस्व के बारे में आए मई के आंकड़े राजस्व संकलन में आई सुस्ती को लेकर चिंता पैदा करते हैं। हालांकि ऐसी आशंकाएं निराधार हैं। किसी एक महीने के राजस्व संग्रह के 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे रह जाने के आधार पर कोई नतीजा निकालना कारोबारी मौसम और वार्षिक राजस्व लक्ष्य जैसे कारकों को ध्यान में रखे बगैर राजस्व अधिकता के आकलन की ही तरह दोषपूर्ण है। इन दोनों पैमानों पर गत सप्ताह आए आंकड़े कर संग्रह में तीव्र वृद्धि दर्शाते हैं।
ये आंकड़े वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में संग्रहीत राजस्व से भी संबंधित हैं। वित्त मंत्रालय के गत पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल में उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर के मद में प्राप्त राजस्व वित्त वर्ष में सबसे कम होते हैं। समूचे वित्त वर्ष में संकलित राजस्व में अप्रैल का अंशदान महज सात फीसदी रहता आया है। इसके उलट मार्च महीना वित्त वर्ष के कुल राजस्व में 11 फीसदी का अंशदान करता है। अप्रैल 2018 में जीएसटी के तहत संग्रहीत राजस्व 94,000 करोड़ रुपये रहा जो मार्च 2018 के 1 लाख करोड़ रुपये से कम है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों की तुलना में यह गिरावट उतनी अधिक नहीं है। दूसरी तरह से देखें तो अप्रैल 2018 में जीएसटी संग्रह के आंकड़े और भी प्रभावी नजर आएंगे। 2018-19 के पूरे साल के लिए 7.44 लाख करोड़ रुपये का संग्रह लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य और गत ïवर्षों की सापेक्षिक दर के हिसाब से तो अप्रैल 2018 में केवल 52,000 करोड़ रुपये ही आने चाहिए थे। लेकिन वास्तविक कर संग्रह 94,000 करोड़ रुपये रहा है जो समूचे वित्त वर्ष के कर लक्ष्य के 12 फीसदी से भी अधिक है।