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pankajgupta029
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किसी गांव में एक साधु रहा करते थे, वह जब भी नाचते थे, तो बारिश होती थी। इसलिए जब भी गांव के लोगों को बारिश की जरूरत होती थी, वे साधु के पास जाते और उनसे अनुरोध करते की वे नाचें और जब साधु ऐसा करते तो बारिश होने लगती। कुछ दिनों बाद चार लड़के शहर से गांव में घूमने आए। जब उन्हें यह बात मालूम हुई कि किसी साधु के नाचने से बारिश होती है तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। उन्हें यह गाव वालों का अंधविश्वास लगा। अपने घमंड में उन्होंने गांव वालों को चुनौती दे दी कि हम भी नाचेंगे तो बारिश होगी और अगर हमारे नाचने से नहीं हुई तो साधु के नाचने से भी नहीं होगी। फिर क्या था, अगले दिन सुबह-सुबह ही गांव वाले उन लड़कों को लेकर साधु की कुटिया पर पहुंच गए।
साधु से सारी बात बताई गई। फिर लड़कों ने नाचना शुरू किया। आधा घंटा बीता और पहला लड़का थक कर बैठ गया, पर बादल नहीं दिखे। कुछ देर में दूसरे ने भी यही किया। एक घंटा बीतते-बीतते बाकी दोनों लड़के भी थक कर बैठ गए, पर बारिश नहीं हुई। अब साधु की बारी थी, उसने नाचना शुरू किया। एक घंटा बीता, दो घंटे बीते, बारिश नहीं हुई, पर साधु ने रुकने का नाम नहीं लिया। शाम ढलने लगी कि तभी बादलों की गड़गड़ाहट हुई और जोरों से बारिश होने लगी।
लड़के दंग रह गए और तुरंत साधु से क्षमा मांगी और पूछा, 'बाबा भला ऐसा क्यों हुआ कि हमारे नाचने से बारिश नहीं हुई और अब हो गई?'
साधु ने उत्तर दिया, 'जब मैं नाचता हूं तो दो बातों का ध्यान रखता हूं। पहली बात यह है कि मैं सोचता हूं कि अगर मैं नाचूंगा तो बारिश को होना ही पड़ेगा। दूसरी बात यह कि मैं तब तक नाचूंगा, जब तक कि बारिश न हो जाए।'