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DilsukhGautam
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21 नवम्बर, वर्ष 2014 को नक्सलियों ने वायुसेना के एक हेलीकॉप्टर को भी निशाना बनाया था। इन आंकड़ों से नक्सलियों के नापाक इरादों का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। नक्सलवादी प्रायः रेलों, सरकारी वाहनों, सड़कों, पुलों, सरकारी विद्यालयों, सरकारी अस्पतालों, पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के शिविरों और उनके काफिलों को अपना निशाना बनाते हैं।
वैसे तो भारत में नक्सलवाद स्वाधीनता संग्राम से पहले ही साम्यवादी या अन्य क्रांतिकारी विचारधारा के रूप में अपनी जड़े जमा चुका था, किन्तु इसे यह नाम पश्चिम बंगाल के नक्सलवाड़ी नामक स्थान से मिला। मार्च, 1967 में इस गांव के एक आदिवासी किसान बियल किसान के खेत पर स्थानीय भू-स्वामियों ने अधिकार कर लिया। इसकी प्रतिक्रियास्वरूप उस क्षेत्र के आदिवासियों ने भू-स्वामियों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह को साम्यवादी क्रांतिकारियों का भारी समर्थन मिला। धीरे-धीरे इस तरह के विद्रोेह भारत में अन्य जगहों पर भी होने लगे और उन्हें नक्सलवाड़ी में हुए एसे प्रथम विद्रोह के नाम पर नक्सलवादी विद्रोह का नाम दिया गया। इस प्रकार, विद्रोह के एक नए रूप नक्सलवाद का प्रादुर्भाव हुआ। नक्सलवाद मार्क्सवादी एवं माओवादी सिद्धान्तों से प्रभावित है। मार्क्सवाद जहां साम्यवादी विचारधारा को बढ़ावा देता है, वहीं माओवाद अपने हक के लिए सशस्त्र क्रांति पर जोर देता है। माओ चीन के सशस्त्र क्रांति के प्रसिद्ध नेता थे, जिनका मानना था कि राजनीतिक सत्ता बन्दूक की नली से निकलती है। इस तरह, नक्सलवाद भू-स्वामियों के विरुद्ध आदिवासियों का एक ऐसा सशस्त्र विद्रोह है, जो अपनी मार्क्सवादी विचारधारा को लागू करने के लिए माओवादी तरीकों को अपनाने पर जोर देता है।