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BrijeshPatel
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सुडान में नील नदी के किनारे बसे एक गांव में नौरा का जन्म हुआ। यह इलाका दक्षिण खार्तूम से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर है। उनके पापा की हार्डवेयर की दुकान थी। बच्चों की परवरिश के लिए उनकी कमाई काफी थी। नौरा स्कूल जाने लगीं। उनके खानदान में बेटियों को ज्यादा पढ़ाने का रिवाज नहीं था। परिवार में कोई महिला नौकरी नहीं करती थी, पर नौरा पढ़-लिखकर जज बनना चाहती थी। यह सन् 2015 की बात है। तब 16 साल की नौरा कक्षा आठ में थी। परिवार ने 32 के साल के चचेरे भाई अब्दुल रहमान से उनका निकाह तय कर दिया।
नौरा ने अब्दुल रहमान से कह दिया, मैं पढ़ना चाहती हूँ। शादी नहीं करूंगी। जब यह बात रिश्तेदारी में फैली, तो हंगामा हो गया। इससे पहले किसी लड़की ने ऐसी हिमाकत नहीं की थी। अचानक एक दिन लड़के वाले घर आ गए और निकाह की रस्में शुरू हो गईं। नौरा किसी तरह सबकी नजरों से बचते हुए भागकर मौसी के घर पहुंच गईं। दो दिन बाद पापा खोजते हुए मौसी के घर पहुंचे और अपने साथ गांव ले आए। जबरन उनकी शादी कर दी गई, मगर वह ससुराल जाने को राजी नहीं हुईं। माहौल शांत करने के लिए घरवालों ने मायके में रहकर पढ़ने की इजाजत दे दी। वह दोबारा स्कूल जाने लगीं। इस बीच उन्होंने दसवीं की परीक्षा दी। शादी के दो साल हो चुके थे। परिवार पर समाज का दबाव था कि बेटी को ससुराल भेजें। आखिर अप्रैल 2017 में उन्हें ससुराल भेज दिया गया।