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LomasVerma
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दिल्ली के गरीब लोगों के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है कि अब उन्हें दस रुपये में भोजन की थाली आसानी से उपलब्ध होगी। उत्तर दिल्ली नगर निगम ने इसके लिए अपने क्षेत्र में 500 ऐसे केंद्र खोलने का फैसला किया है, जहां यह थाली उपलब्ध होगी। यह परियोजना दक्षिण दिल्ली नगर निगम के क्षेत्र में भी शुरू हो चुकी है और उम्मीद है कि जल्द ही दिल्ली के अन्य नगर निगमों में भी इसे विस्तार दिया जाएगा। ऐसी योजनाएं जब भी शुरू होती हैं, उन्हें चुनाव से जोड़कर देखा जाने लगता है। 2019 का आम चुनाव बहुत दूर नहीं है, इसलिए ऐसा सोचा जाना स्वाभाविक भी है। हालांकि यह कोई नई योजना नहीं है। काफी पहले जब शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं, तो उन्होंने एक जन आहार योजना शुरू की थी, ताजा योजना को उसी का एक विस्तार कहा जा सकता है। ये जरूर है कि इसे अब दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना के तहत लागू किया जा रहा है, जिसे पिछले साल 25 दिसंबर को यानी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर शुरू किया गया था। दिल्ली के लिए इस तरह की योजना जरूरी भी है, यहां गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाला गरीब तबका तो है ही, काम और मजदूरी की आस में यहां लगातार ऐसे लोग आते हैं, जो घर-परिवार से दूर होते हैं, उनके पास खाना बनाने की व्यवस्था नहीं होती, और न ही इतना पैसा होता है कि बाजार के किसी रेस्तरां में पेट भर सकें।
वैसे दिल्ली में हम जो प्रयोग देख रहे हैं, वह देश के कई हिस्सों में पहले ही बड़े पैमाने पर शुरू हो चुका है। इसकी शुरुआत तमिलनाडु में 2013 में ही हो गई थी। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता द्वारा शुरू की गई अम्मा उनावगम यानी अम्मा कैंटीन नाम की यह योजना गरीबों को पांच रुपये में सांभर और चावल उपलब्ध कराने के लिए काफी चर्चा में रही थी तमिलनाडु की इसी योजना से प्रभावित होकर पड़ोस के राज्य आंध्रप्रदेश में अन्नपूर्णा योजना लागू की गई थी। ओडिशा की आहार योजना भी इसी से मिलती-जुलती थी, जिसकी सफलता का कई जगह जिक्र होता है।