words per minute

22

EducationFirst


00:00

Speed

ेश में बिना भेदभाव निर्बाध इंटरनेट की पहुंच बनाए रखने के लिए दूरसंचार आयोग ने नेट न्यूट्रलिटी के नियमों को मंजूरी देकर फेसबुक की ‘फ्री बेसिक’ एयरटेल की ‘जीरो’ योजना का एक तरह से अंत कर दिया। दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों के व्यावसायिक हितों से आम उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करते हुए देश में इंटरनेट की आजादी सुनिश्चित कर दी गई है। आयोग का फैसला दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों के अनुरूप ही है। इसने दूरसंचार मंत्रालय की भेदभाव रहित इंटरनेट सुविधा प्रदान करने की नीति को अमलीजामा पहना दिया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर सेवा प्रदाता कंपनियां दंडित होंगी। पिछले कुछ सालों से नेट न्यूट्रलिटी के मुद्दे पर पूरी दुनिया में बहस चल रही है। प्रमुख सेवा प्रदाता कंपनियां लगातार दबाव बना रही थीं कि आम लोगों को बुनियादी इंटरनेट की मुफ्त सुविधा देने के लिए उन्हें इंटरनेट की स्पीड, कंटेंट, प्लेटफॉर्म इस्तेमाल के तरीकों में प्राथमिकता तय करने और विशेष उपभोक्ताओं से अलग-अलग कीमत वसूलने की इजाजत मिले। उनका तर्क यह था कि ऐसा होने पर गरीबों को लाभ उनकी तरक्कीका मार्ग प्रशस्त होगा। हालांकि, इसका जबरदस्त विरोध भी हो रहा था। लेकिन, सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि सिर्फ नियम बना कर ही काम खत्म नहीं हो जाता। नियमों की मनमाफिक व्याख्या कर उनका अपने पक्ष में इस्तेमाल करना या उनकी अनदेखी करते हुए उल्लू सीधा करते रहना प्रभावशाली कंपनियों के लिए आम है। उदाहरण के लिए शराब के प्रचार पर रोक के नियम को धता बताते हुए उसी ब्रांड के सॉफ्ट ड्रिंक का प्रचार करना। जाहिर है कि निगरानी नियंत्रण के लिए सरकार को नया तंत्र विकसित करना होगा। वर्तमान व्यवस्थाओं में मनमानी रोकना सरकार के लिए वैसे ही मुश्किल है जैसे सोशल साइटों पर अफवाह रोकना या अश्लील सामग्री को नियंत्रित करना। देश में बुनियादी आइटी ढांचे के विकास इसके प्रबंधन पर सरकार को जोर देना चाहिए।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 530 - English

words per minute