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AmarVerma3238
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अमेरिका की दिग्गज रिटेल कंपनी वालमार्ट और ई-रिटेलर अमेजन के बीच घमासान चल रहा है। वालमार्ट ने अमेरिका के सभी प्रमुख शहरो में बड़े-बड़े स्टोर बना रखे है जिनमे वह चीन से खरीदे गए सस्ते माल को अमेरिकी ग्राहको को उपलब्ध कराती है। ग्राहक दुकानों से माल खरीदना चाहते है, क्योकि वे खरीदने से पहले उसे स्वयं देख सकत है। इसके मुकाबले अमेजन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स प्लेटफॉर्म पर बड़ी तादाद में उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहें हैं। इसमे उपभोक्ता घर बैठे ऑडर दे सकता है और कूरियर द्वारा त्पाद उसके पते पर पहुचा दिया जाता है। वालमार्ट कई वर्षों से भारत में अपने मेगास्टोर खोलने की कोशिश में जुटी है। भारत सरकार का नियम है कि कोई विदेशी कंपनी एक छत के नीचे मल्टी ब्राड स्टोर यानी कई ब्रांड बेचने वाले स्टोर स्थापित नहीं कर सकती। वालमार्ट द्वारा एप्पल के आइफोन, हर्शीज के चॉकलेट और नाइकी के जूतो से लेकर तमाम ब्राडों के उत्पाद बेचे जाते है। ऐसे स्टोर पर भारत-सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। इस नीति से वालमार्ट परेशान थी।
वालमार्ट ने इस संकट से उबरने के लिए भारत की ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीदने की पहल की है। भारत में ई-कॉमर्स मे सौ-प्रतिशत विदेशी निवेश किया जा सकता है। वालमार्ट स्वयं दुकान नहीं खोल सकती लेकिन वह इलेक्ट्रनिक-माध्यम से माल बेच सकती है। इसलिए वालमार्ट ने फ्लिपकार्ट को खरीदा, ताकि वह भारत में अपनी पैठ आसानी से बना सके। वालमार्ट सस्ते माल को चीन से खरीदकर अमेरिका में बेच रही है। यह लगभग तय है कि वह इसी तर्ज पर फ्लिपकार्ट के माध्यम से सस्ते चीनी माल को भारत में बेचेगी। भारत की किराना दुकाने वालमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट को खरीदने का विरोध कर रही है। उन्हे आशंका है कि वालमार्ट द्वारा सस्ते माल उपलब्ध कराने से उनका धंधा चौपट हो जाएगा, लेकिन वालमार्ट यदि फ्लिपकार्ट को न ले तब भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि चीन के माल ने भारतीय बाजार में कोहराम मचा रखा है। इसलिए हमे चीन के माल के सस्ता होने की मूल समस्या पर विचार करना चाहिए।