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SarthakAgarwal1174
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भारतीय सरकारी नौकरी बहुत पसंद करते हैं। लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे बताता है कि सरकारी नौकरी का यह का यह आकर्षण वक्त के साथ बढ़ा है। सरकारी जॉब को तरजीत देने वाले 2007 में 62 फीसदी थे, जो 2016 में 64 फीसदी हो गए। इसी अवधि में प्राइवेट जॉब को तरजीह देने वाले 13 फीसदी से घटकर 7 फीसदी हो गए। एक कारण जॉब सिक्योरिटी है। 14 फीसदी युवाओं ने यह बात मानी है। दूसरी वजह सरकार नौकरी के लिए अतिरिक्त सामाजिक सम्मान है। फिर सरकारी जॉब जो निश्चितता और वर्कलाइफ देते प्रतीत होते हैं, निजी क्षेत्र उसकी बराबरी नहीं कर पाया है।
कुछ लोगों ने शिकायत की कि निजी क्षेत्र कर्मचारियों पर काम का बहुत दबाव डालता है, कुछ ने कहा कि वहां काम करने का अच्छा माहौल नहीं होता और कुछ ने कम तनख्वाह की शिकायत की। एक संकेतक कर्मचारियों को छोड़कर जाना है। हम सुनते रहते हैं कि कोई व्यक्ति एक कंपनी छोड़कर दूसरे में चला गया। सार्वजनिक क्षेत्र में ऐसे कितने लोगों को हम जानते हैं? जाहिर है कि निजी क्षेत्र वह जॉब संतुष्टि नहीं दे पा रहा है, जो सार्वजनिक क्षेत्र दे रहा है। लेकिन, हम सब जानते हैं निजी क्षेत्र में रोजगार की कहीं ज्यादा संभावनाएं हैं। फिर निजी क्षेत्र की सारी ही कंपनियों में कर्मचारियों के प्रतिकूल माहौल नहीं है। कुछ में तो शानदार कार्य-संस्कृति, फायदे और कॅरियर में तरक्की के अवसर मौजूद हैं। लेकिन, आमधारणा गलत होने से इन कंपनियों को भी श्रेष्ठ कर्मचारी नहीं मिलते। फिर निजी क्षेत्र के प्रति कर्मचारियों में आकर्षण बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए?
एक तरीका यह है कि सरकार स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त करें, जो कर्मचारियों संबंधी मानकों पर कंपनियों को रेटिंग दे। यह उसी तरह होगा जैसे सरकार विश्वविद्यालयों को रेटिंग देती है। इससे कर्मचारियों को यह जानने में मदद मिलेगी कि जॉब सुरक्षा, वेतन, कार्य-संस्कृति, पेंशन आदि मानकों पर कौन-सी कंपनी बेहतर है। इससे उनका जॉब सेटिस्फेक्शन बढ़ेगा, क्योंकि वे अपनी पसंद की कंपनी में काम कर रहे होंगे। आगे जाने का रास्ता भारत की सारी कंपनियों की सालाना एम्प्लायर रेटिंग प्रकाशित करना है। ऐसी रेटिंग प्रणाली कर्मचारी, सरकार व निजी क्षेत्र सभी के लिए फायदे की बात होगी। कर्मचारी फायदे में होंगे क्योंकि बेहतर प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए कंपनियां कार्य-संस्कृति में सुधार लाकर अधिक रेटिंग प्राप्त करने की कोशिश करेंगी। सरकार को यह फायदा होगा कि निजी क्षेत्र के प्रति अंसतोष घटने से सरकारी नौकरियों की मांग घटेगी। यहां तक कि निजी कंपनियां भी फायदे में होंगी।