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NavneetKumar1637684
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भारत में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है और सरकार इस असमानता को दूर करने की दिशा में कोई कदम भी नहीं उठा पा रही। गेर-सरकारी संगठन ऑक्सफैम और डिवेलपमेंट फाइनेंस इंटरनेशनल द्वारा इस संबंध में तैयार वैश्विक सूचकांक भारत सरकार की नीतियों और हाल की विकास प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा करता है। इस सूचकांक में सामाजिक खर्च, कर ढांचा और श्रमिकों के अधिकार संबंधी नीतियों के आधार पर 157 देशों की रैंकिंग की गई है जिसमें डेनमार्क सबसे कम विषमता के साथ शीर्ष पर है, जबकि भारत का मुकाम 147वां यानी लगभग तली में है। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया, नामीबिया और उरुग्वे जैसे देश असमानता दूर करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं लेकिन भारत और नाइजीरिया जैसे देशों का प्रदर्शन इस मामले में काफी खराब है। सूचकांक में 56 वें पायदान पर स्थित दक्षिण कोरिया के प्रयासों को रिपोर्ट में सामाजिक विकास के कई कार्यक्रम चलाए और श्रमिकों के अधिकार सुनिश्चित किए। राष्ट्रपति मून जे-इन ने नाटकीय तरीके से न्यूनतम मजदूरी 16.4 प्रतिशत बढ़ा दी।