words per minute
8
KuldeepTrivedi
00:00
Speed
कहते हैं कि सच्चे भक्त का मार्गदर्शन ईश्वर करता है। कुटिल लोग आपना किया गिनाते बहुत हैं। जिनकी जिंदगी समीकरण पर चलती है, वे किसी को यदि कुछ दें तो उसका हिसाब नहीं रखते। दरियादिल लोग हिसाब नहीं रखते। किसी के लिए कुछ किया और भाप बनाकर उड़ा दिया। लेकिन रावण उन लोगों में से था जो अपने किए हुए को गिनाता था। जब युद्ध हुआ और जान पर बन आई तो राक्षस भागे। उनको लगा रावण ने जो दिया अपनी जगह है लेकनि, उसके बदले हम अपनी जान दें यह समझ में नहीं आता। तो देने वाला स्वार्थी था, लेने वाले भी विलासी थ्ज्ञे। कुल-मिलाकर दृश्य ऐसा पैदा हुआ कि राक्षस भागे तो रावण चिल्लाया। तुलसीदास जी ने लिखा- ‘जो रन बिमुख सुना मैं काना। से मैं हतब कराल कृपाना।। सबई खाई भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।। मैं जिसके बारे में सुनूंगा कि वह युद्ध भूमि से भागा उसे स्वंम दोधारी तलवार से मारूंगा। मेरा सबकुछ खाया, भांति-भांति के भोग किए और अब प्राण प्यारे हो गए? रावण की इस धमकी से सीखना चाहिए कि हमारा संबंध कभी ऐसे लोगों से न रहे जो हमें संकोच हो। लेन-देन में सावधानी के साथ दिल भी बड़ा रखिए। यदि आप स्वयं भगवान के भक्त हैं तो देते समय मानना कि जरूरत पड़ी तो वे ही लौटाएंगे। यदि ले रहे हैं तो एक बार भगवान पर भरोसा करके विचार करना कि क्या उसकी सहमति है? सच्चे भक्त को भगवान इशारे जरूर देता है और तब लेन-देन की घटना आपके लिए नुकसान नहीं होगी।
आपका मित्र अमित कुमार साहू छतरपुर 7697055315