words per minute
3
Dev_Rajoriya
00:00
Speed
मित्रता जल्दी बढ़ने वाला पौधा नहीं है। यद्यपि आदर के उपजाऊ खेत में वह उगता है, तो भी प्रेमपूर्ण मधुरालाप की खाद डालकर उसे बड़ा करना पड़ता है। सच्ची मित्रता धीरे बढ़ने वाला पौधा है, जो प्रकट और समान योग्यता के खेत में ही पनपता है। बनावटी दोस्त अमरबेल के समान है, जो जिस पेड़ पर रहेगी, उसे सुखा डालेगी। मित्रता को धीरे धीरे बढ़ने दो, यदि वह बेतहाशा बढ़ती है तो निश्चय जानो कि उसका अन्त निकट है। प्रेम बड़ा महँगा है, सच्ची दोस्ती उससे भी अधिक महँगी । सच्चे दोस्त सुख में न्यौता देने पर आते है, पर दु:ख में बिना बुलाये ही मदद को दौड़ते है। मूर्ख मित्र की अपेक्षा विद्वान शत्रु भला है।
देव राजौरिया पी.जी. कॉलेज मुरैना।