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RohitSharma1543571
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किशोर के संबंध में आदेश देते समय अधिकारी किशोर की उम्र उसकी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति पृष्ठभूमि बच्चे का धर्म और रिपोर्ट आदि सभी बातों का ध्यान रखता है हालांकि भारतीय दण्उ सहिंता में बच्चों के खिलाफ अपराधों का उल्लेख किया गया है लेकिन नये अधिनियम में तो किशोरो संबंधी विशेष अपराधों का एक पूरा अध्याय ही रख गया हे। किसी व्यक्ति के पास कोई किशोर हो ओर वह उस किशोर से दूराचार करे उसका परित्याग करें उपेक्षा करें अथवा कोई व्यक्ति किशोर से ऐसा करवाता है या किसी के लिए यह सब करने की खातिर किशोर को लाता है तो उसे 6 माह की सजा और जुर्माना हो सकता है जो व्यक्ति किसी किशोर से भीख मंगवाता अथवा भीख मांगने के लिए नौकर रखता है तो उसे 3 साल की सजा और जुर्माना किया जा सकता हे । जो भी व्यक्ति किशोर को सर्वजनिक स्थान मे नशीला पेय पदार्थ देता है। या कोर्इ नशीली दवा देता है या दिमाग पर खराब असर करने वाली चीज देता है तो उसे 3 साल की सजा ओर जुर्माना का दण्ड दिया जा सकता है हां अगर पदार्थ किसी डाक्टर की राय से दिया जाए तो यह अपराध नहीं हैं जो भी व्यक्ति किसी किशाेर को नौकरी के लिए लाता है और उसका वेतन नहीं देता उसे भी 3 साल की सजा और जुर्माने का दण्ड दिया जा सकता है भारतीय दण्ड सहिता में बच्चों द्वारा किए गए अपराधों तथा किशोर के साथ किए गए अपराधों का वर्णन है 7 साल से कम उम्र के बच्चे को किसी अपराध के लिए दण्ड नहीं दिया जा सकता वह अपराध कर ही नहीं सकता अगर 7 साल से 12 साल तक बच्चा इतना समझदार ना हो कि वह किए गए काम की गम्भीरता और उसके परिणाम को समझ सके तो उसके लिए किए गए किसी काम को अपराध नहीं माना जा सकता अन्य अवस्था में भी केवल अपने किए गए काम के लिए जिम्मेदार होगा अगर कोई व्यक्ति ऐसा काम करता है कि बच्चा जीवित जनमें ही नही जन्म के बाद बच्चे को मार देता है या मर जाने देता है तो उसे दण्ड दिया जा सकता है अगर उसने यह काम मां को बचाने की खतिर किया हो तो दण्डनीय नहीं है अगर कोई व्यक्ति चुपचाप बच्चे की लाश को दफन करके बच्चे का जनम होना छिपाता है तो उसे जेल की सजा हो सकती है अगर कोई माता पिताअपने 12 साल से कम उम्र के बच्चे या बच्ची का परित्याग कर देता है या घर से निकाल देता है या असुरक्षित छोड देता हे तो वह अपराधी माना जायेगा ।