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PradeepMaurya1167570
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उन्होंने निराशा के अन्धकार में डूबी जनता के सामने भगवान राम का लोक मंगलकारी स्वरूप प्रदान किया। तुलसीदास एक लोकनायक थे। इन्होंने समन्वयकारी भूमिका का निर्वाह किया। इनके बारे में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा था-“लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय कर सके, क्योंकि भारतीय समाज में नाना प्रकार की विरोधी संस्कृतियाँ, जातियाँ, आचार निष्ठा और विचार-पद्धतियाँ प्रचलित हैं। बुद्धदेव समन्वयकारी थे। गीता ने समन्वय की चेष्टा की और तुलसीदास भी समन्वयकारी थे।” तुलसी के ‘राम’ परमबह्म थे, जिन्होंने भूमि का भार हरण करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया। भगवान राम के वह अनन्य भक्त थे, उन पर उन्हें पूरा भरोसा था। तुलसीदास के काव्य की सबसे बड़ी विशेषता धर्म-समन्वय है। सगुण निर्गुण ब्रह्म को उन्होंने एक माना है। भक्ति के विभिन्न स्वरूपों और मतों को समन्वय का संदेश देते हुए मानवता का संदेश दिया। अपने समय में प्रचलित शैव-वैष्णव मतों को दूर करने के विचार से राम के द्वारा तुलसीदास ने संदेश दिलवाया है। कवि शिरोमणि तुलसीदास के सभी काव्य-ग्रन्थों में धर्म-निरपेक्षता और मानवीयता का दिव्य-सन्देश सुनाई पड़ता है। कर्म की प्रधानता तुलसीदास ने सर्वोपरि बताई है। रामचरितमानस इनका उत्कृष्ट ग्रन्थ है। इसके अलावा इनहोंने समाज को विनय-पत्रिका, कवितावली, दोहावली, गीतावली, बरवै रामायण, पार्वती-मंगल, जानकी-मंगल, हनुमान-बाहुक आदिु अनुपम ग्रन्थ दिये। तुलसी ने वर्तमान और भविष्य स्वदेश और विश्व व्यष्टि और समष्टि को अपनी कविता में स्थान दिया है। इनकी कविता हर युग में मूल्यवान मानी जाएगी।