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prachishrivastava
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पिछले कुछ वर्षों में जीवन विज्ञान में चमत्कृत कर देने वाले नए अनुसंधान तेजी से बढ़े हैं। इस दिशा में हैरान कर देने वाली हालिया खबर है- एक चीनी वैज्ञानिक द्वारा जुड़वा बच्चियों के पैदा होने से पहले ही उनके जींस में बदलाव करने का दावा। जीन सजीवों में सूचना की बुनियादी इकाई और डीएनए का एक हिस्सा होता है। जीन इस लिहाज से स्वार्थी होते हैं कि उनका एकमात्र उद्देश्य होता है स्वयं की ज्यादा से ज्यादा प्रतिलिपियों को अगली पीढ़ी में पहुंचाना। कह सकते हैं कि काफी हद तक हम वैसा ही दिखते हैं या वही करते हैं, जो हमारे शरीर में छिपे सूक्ष्म जीन तय करते हैं। चूंकि शरीर में क्रियाशील जीन की स्थिति ही बीमारी विशेष को आमंत्रित करती है, इसलिए वैज्ञानिक लंबे समय से मनुष्य की जीन कंडली को पढने में जटे हें। इस दिशा में इतनी प्रगति हुई है कि अब जेनेटिक इंजीनियर आसानी से आणविक कैंची का इस्तेमाल करके दोषपूर्ण जीन की काट-छांट कर सकते हैं। जीन एडिटिंग की इस तकनीक को व्यावहारिक रूप से पौधों या जानवरों की किसी भी प्रजाति पर लागू किया जा सकता है। हालांकि मनुष्य के जीनोम में बदलाव करने की तकनीक बेहद विवादास्पद होने के कारण अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे लोकतांत्रिक देशों में प्रतिबंधित है। चीन ही एक ऐसा देश है जहां मानव जीनोम में फेरबदल करने पर प्रतिबंध नहीं है। वहां पिछले कुछ वर्षों से काफी तेज काम हुआ है। इसी कड़ी में ताजा समाचार है चीनी शोधकर्ता हे च्यानक्वी द्वारा जुड़वां बच्चियों के पैदा होने से पहले ही उनके जींव में फेरबदल करने का दावा। जियानकुई ने यह दावा एक यू ट्यूब वीडियों के माध्यम से किया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और न ही किसी मानक साइंस जर्नल में इसका प्रकाशन हुआ है। जीन एडिटिंग तकनीक आनुवंशिक बीमारियों का इलाज करने की दिशा में निश्चित रूप से एक मील का पत्थर है। यह निकट भविष्य में आणविक स्तर पर रोगों को समझने और उनसे लड़ने के लिए एक अचूक हथियार साबित हो सकता है। लेकिन यह भी सच है कि ज्ञान दुधारी तलवार होता है। इसलिए च्यानक्वी के प्रयोग पर तमाम सामाजिक संस्थाओं और बुद्धिजीवियों ने आपत्त्ि जतानी शुरू कर दी है तथा मानव जीन एडिटिंग पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।