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VIVEKYADAV21744889
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चौदह बरस की उम्र में जब पहली बार मुझसे फिल्म में काम करे को कहा गया, तो मैं घबरा गई थी। इस बारे में मैं कुछ नहीं जानती थी। बाद में मां ने समझाया, तो फिल्म के लिे तैयार हुई। हालांकि तैयारी तब भी पूरी नहीं थी, क्योंक मद्रास की एक फिल्म में ऑफर मिला. पर वह असफल रहा। इससे दिल तो चूटा, लेकिन इस चोट ने मुझे आगे बढ़ना सिखाया। तभी यानी बचपना में ही मैंने तय क लिया कि असफलता से कभी घबराऊंगी नहीं और सफल होकर रहूमगी। इसके बाद मैं भीरे-धीरे सफत्रा पकड़ती गई और अंत में मेरी मेहनत रंग लाइ।
बचपन में हमें कुछ मालूम ही नहीं था। कि क्या हो रहा है? बिल्कु किसी दूसरे मासूम की तरह, जिसे कुछ भी पता नहीं होता। मैं हमेशा म्मी का पल्लू पकड़कर रती थी। मेरे दो बड़े भाई भी हैं। उनका साथ तो रहा ही, लेकिन मुझे जो भी सिखाया, माम ने सिखाया। जब तीन वर्ष की थी, तभी हम दिल्ली आ गए। मेरे पिता यहां काम करते थे, यह अधिकारी थे। मैं दिल्ली में ही पली-बढ़ी। यहीं स्कूलिंग हुई। इसलिए हिंदी मेरे लिए कोी समस्या नहीं बनी। सामान्यत: बेटियां किचन में जाती हैं, लेकिन