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SunilGour
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एक दिन की बात सुनिए। गर्मी का मौसम था। पल-पल पर गर्मी बढ़ती जाती थी और आदमी पानी-पानी चिल्लाकर अपने गले को और भी जियादा सुखाते जाते थे। ऐसे वक्त में मेरे गांव के कुछ आदमी मेरे पास आए। उन्होंने कहा कि गांव के पास का तालाब करीब-करीब बिलकुल सूख गया है। बीच में थोड़ा-सा पानी रह गया है। वह पानी पीकर हमलोग किसी तरह से अपने प्राण बचाते हैं पर कई दिनों से, रात के वक्त एक बहुत बड़ा जंगली सुअर वहां पर आता है। वह उस कुण्ड से पानी भी पीता है और उसमें लोटकर बचे हुए पानी को कीचड़ कर देता है। इस वजह से वह पानी हम लोगों के पीने के लायक नहीं रह जाता। आप इसका कुछ बंदोबस्त कीजिए।
यह सुनकर मुझे बड़ी खुशी हुई, क्योंकि मैं एक शौकीन शिकारी हूँ और निशाना भी बहुत अच्छा लगाता हूँ। मैंने उन लोगों से कहा कि आज चाँदनी रात है इसलिए आज ही मैं सुअर का शिकार खेलना चाहता हूँ। तुम अभी जाकर तालाब के पास के पेड़ पर एक मचान बना दो। वे तो यह चाहत ही थे। उन्होंने फौरन ही एक मचान मेरे लिए तैयार कर दिया।
रात हुई। आठ बज गए मैंने खाने को खाया अपनी मामूली शिकारी पोशाक पहनी बंदूक हाथ में उठाई और एक भाला और एक पेशकब्ज भी हाथ में लिया। इस तरह साज-सामान से दुरूस्त होकर मैं उस तालाब की तरफ रवाना हुआ। तालाब के पास पेड़ पर मचान को देखकर मैं खुशी से फूल उठा। भाले को मैंने उस मचान के ठीक नीचे गाड़ दिया और चढ़कर उसके ऊपर आसन जमाकर मैं बैठ गया। वहां पर मैं बिल्कुल अकेला था। मगर मैं बड़ा निडर हूँ। मुझे जरा भी डर न लगा। वायु मंद-मंद चल रही थी। उसने नींद को झटपट मेरी आंखों के सामने लाकर खड़ा कर दिया। मगर मैं उसके काबू में आनेवाला आदमी नहीं। इसलिए उस बेचारी को मुझसे दो गज दूर ही खड़ा रहना पड़ा।
इतने में कुछ दूर पर मुझे आहट मालूम हुई मैं समझ गया कि वराह महाराज की सवारी आ गई। मेरा यह अनुमान ठीक निकला। तालाब के पास एक गुफा थी। वहीं पर वह सुअर आकर कंद-मूल खोद-खोदकर खाने लगा मैंने अपनी बंदूक संभाली, और इस ताक में लगा कि वह सुअर वहां से जरा और आगे बढ़े तो मैं उसे अपनी गोली का निशाना बनाऊं। इतने में एक और अजीब घटना हुई। जिस पेड़ पर मैं था, उस पर एक बड़ा ही भयानक सांप चढ़ आया। मैं कांप उठा। मैंने समझा कि मेरी मौत आ गई। मगर मैं चिल्लाया नहीं और न उस सांप को पकड़कर जमीन में पटकूंगा, तो आवाज सुनकर वह सुअर भाग जाएगा। अब आप समझ गए होंगे कि जैसा मैंने ऊपर कहा है, मुझे अपने प्राण उतने प्यारे नहीं हैं, जितना कि मुझे शिकार प्यारा है।