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मानव संबंधों में कुशलता प्राप्त करने के लिए उसी प्रकार प्रत्यन करना पड़ता है, जिस प्रकार की-बोर्ड को सीखने के लिए प्रयास करने पड़ेत हैं। जिस व्यक्ति को पियानो बजाना आता है तो वह कोई भी धुन बजाकर श्रोताओं के चिकत कर सकता है। यदि पियानोवादक इसे बिना सीखे चलाने का प्रयत्न करेगा तो वह नौसिखिया ही कहलाएगा और धुन को भी सुरीला नहीं बजा पाएगा, बिल्कुल यही स्थित मानव संबंधों के साथ भी होती है। व्यक्ति जीवन में अनेक व्यक्तियों से मिलता है और सभी अलग-अलग तरह के होते हैं। यदि उनसे व्यवहार करने के लिए व्यक्ति अलग-अलग तरीके सीखने का प्रयास करेगा तो इसमें उसका बहुत अधिक समय लग जाएगा। इसके विपरीत यदि वह मानव संबंधों के कुछ बिनियादी सिद्धांतों को सीख जाएगा तो वह हर तरह के मानव संबंधों में कुशल बन जाएगा। प्रत्येक संगीत रचान दूसरे संगीत से भिन्न होती है। इसी तरह कुशल मानव संबंध बनाने के लिए अलग-अलग चालें नहीं, बल्कि मानव संबंधों की बुनियाद में निपुणता हासिल करनी होती है। यदि आपको मानव संबंधों का की-बोर्ड अच्छी तरह चलाना आता है तो आप बाधाओं में भी अवसरों को उत्पन्न कर सकते हैं, जबकि मानव संबंधों के की-बोर्ड का ज्ञान न होने पर अवसर भी रूकावट बनकर मार्ग में खड़े हो जाते हैं। मानव संबंधों के की-बोर्ड का ज्ञान होने पर आप कठिन से कठिन समस्या और परेशानी को भी सहजता से दूर कर सकते हैं और स्वयं को अनेक पीड़ाओं और परेशानियों से बचा सकते हैं। मानव संबंधों के महत्वपूर्ण की-बोर्ड हैं-व्यक्तियों से बातें करते समय उनमें रुचि लें, बेरुखी न दर्शाएं। ऐसा करने से व्यक्ति गहराई तक हृदय से जुड़ जाता है। इस की-बोर्ड का निरंतर अभ्यास आपको कभी भी हारने नहीं देगा। मानव संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है कि व्यक्ति को उसके प्राकृतिक स्वरूप में स्वीकार करके उससे संबंध बनाएं और फिर हर कार्य में सफलता पाएं। व्यक्ति का समर्थन करें। समर्थन मिलने पर व्यक्ति के अंदर उत्साह जाग्रत हो जाता है और धीरे-धीरे वह प्रशंसनीय कार्य करने लगता है। इस तरह आपकी उसके प्रति जो शिकायतें होती हैं वे स्वतः ही कुशल मानव संबंधों के जाल में फसकर दूर हो जाती हैं।