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RakeshSharma3521
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चुनौतियों से पार पाने के लिए जीवन में सहने का अभ्यास जरूरी है। इसके बिना किसी का भविष्य अज्ज्वल नहीं हो सकता। हर व्यक्ति को अपने जीवन में कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना होता है। यह एख सार्वभौम सत्य है। समस्याओं को देखने के लिए भी सकारात्मक नजरिया बहुत अपेक्षित होता है। क्योंकि समय और परिस्थिति के अनुसार समस्याओं का रूपांतरण होता रहता है। जो सहिष्णुता, धैर्य एवं आत्मविश्वास का कवच धारण कर लेते हैं उनके लिए समस्याएं भी समाधान बनजाती हैं। आज जिन राष्ट्रों में सुख-सुविधा के साधनों का विस्तार हो रहा है, वहीं सहने का अभ्यास घटता जा रहा हैं। परिणामस्वरूप वहां नाना प्रकार के मनोरोगों की वृद्धि हो रही है तथा अतमहत्या के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं।
खुद के बारे में सच जानना होतो जरूरी है कि आप यह महसूस करें कि आप एक बेहतर इंसान हैं। जो लोग खुद को बुरा मानते हैं, वे आमतौर पर हारे और टूटे हुए होते हैं। तो फिर सवाल उटता है कि अच्छाई आती कहां से है? दरअसल जीनव में ऊंचाई और गहराई का भी समन्वय आवश्यक है। हर व्यक्ति के मन में ऊंचाई पर पहुचने का आकर्षण है, पर गहराई के बिना ऊंचाई भी वरदान नहीं होकर अभिशाप सिद्ध होती है। भारत की जीवनशैली में जो परिपक्वता, स्थिरता है, यह ऊंचाई और गहराई के समन्वय का परिणाम है। इसी के परिणामस्वरूप विश्व के प्रबुद्ध लोगों के मानस में यहां के मौलिक आदर्शों और संस्कारों के प्रति आदर का भाव रहा है। भारतीय दर्शन के अनुसार तरक्की की यात्रा अकेले नहीं हो सकती। जरूरी है कि आप अपन साथ दूसरों को भी आगे ले जाएं। उनके जीवन पर अच्छा असर डालें। कितनी ही बार आपकी एक हंसी, एक हामी, छोटी सी मदद दूसरे का दिन अच्छा बना देती है।
किसी भी कार्य के प्रारंभ में अवरोघों का माना करना होता है। जो उनसे विचलित हो जाते हैं वे अपन लक्ष्य में सफल नहीं हो सकते। जो धीरज से आगे बढ़ते हैं और उन अवरोधों का निराकरण खोजने में सफल हो जाते हैं। जिंदगी उन्हीं का साथ देती है, जो अपने बल पर कुछ अलग करने की ठानते हैं। जितने बड़े सपने होते हैं, जीवन उतना बड़ा नजर आता हैं।