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JasvirSingh1427007
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बुराई का बुरा अंत । तीन चोर थे। एक रात उन्होंने एक मालदार की आदमी के यहां चोरी की । चारों के हाथ खूब माल लगा। उन्होंने सारा धन एक थैले में भरा और उसे लेकर जंगल की ओर भाग निकले। जंगल में पहुंचने पर उन्हें जोर की भूख लगी। वहॉ खाने को तो कुछ नहीं था, इसलिए उनमें से एक चोर पास के होटल से खाने को कुछ सामान लाने गया। बांकी के दोनों चोर चोरी के माल की रखवाली के लिए जंगल में ही रहे। जो चोर खाने का सामान लाने गया था, उसकी नीयत खराब हो गई। पहले उसने होटल में खुद छिपकर भोजन किया फिर उसने अपने साथियों के लिए खाने को सामान खरीदा और उसमें तेज जहर मिला दिया। उसने सोचा कि जहरीला खाना खा कर उसके दोनों साथी मर जायेंगे, तो सारा धन उसी का हो जायेगा। इधर जंगल में दोनों चोरों ने खाने का सामान लाने गये साथी चोर को मार डालने की योजना बना ली थी। वे उसे अपने रास्ते से हटाकर सारा धन आपस में बांट लेना चाहते थे। तीनों चोरों ने अपनी-अपनी योजनाओं के अनुसार कार्य किया। पहला चोर ज्यों ही जहरीला भोजन लेकर जंगल में पहुंचा कि उसकी दोनों साथी चोर उस पर टूट पड़े। उन्होंने उसका काम तमाम कर दिया। फिर वे निश्चित होकर भोजन करने बैठे। मगर जहरीला भोजन खाते ही वे दोनों भी तड़प-तड़प कर मर गये इस प्रकार उन बुरे लोगों का अंत ही हुआ। बुराई का अंत बुरा ही होता है