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krishnasharma1423660
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श्रीमान अपने अनुभव के पश्चात जैसा मैने पुर्व में बताया कि अपनी गलत नीतियों के कारण सरकार अब चावल के थोक व्यापार से बाज आयेगी परंतु मेरी समझ में यह नहीं आता है कि सरकार किस आधार पर ऐसी नीति निर्धारित करती है हमने पहले सोचा था कि हमारी सरकार अच्छी है सरकार का कार्य अच्छा है शायद हमारी सरकार किसानों के हित में नीति निर्धारित करती है वह भी साकार नहीं हो सका फिर सोचा कि उपभोक्ताओं के हित में नीति निर्धारित कर रही है वह भी सच नहीं हुआ बाद में हमारी समझ में आया कि वह सिर्फ अपनी छवि बनाने के लिये नीति निर्धारित करती है लेकिन जब हम देखते है तो मालूम होता है कि यदि किसानो के हित में यह नीति बनाई है तो उसका लागत मुल्य उनको मिलना चाहिए उन्हें वह भी नहीं मिला यदि उसने उपभोक्ताओं के हित में नीति निर्धारित की है तो क्या उनको उचित मुल्य पर वे वस्तुऐं उपलब्ध हुई है जो अपने हित में यह नीति बनाई है तो क्या सरकार के कार्य की लोगों ने प्रशंसा की है। यह प्रश्न कि क्या अपीलार्थी दण्डसंहिता की धारा 92 का लाभ पाने का हकदार है या नहीं जिसके अंतर्गत यह उपबंध किया गया है कि कोई बात अपराध नहीं है जो ऐसे व्यक्तियों द्वारा की जाती है जो करते समये चित्त विकृती के कारण या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है जानने में असमर्थ है अभिलेख पर विचार करने से पूर्व उन्मत्ता के आधार पर अपीलार्थी द्वारा हम उन पहलूओं पर विचार करना आवश्यक समझते है जो ऐसे मामलों के साथ सुसंगत है जिनमें उन्मत्ता अभिवाक किसी अपराध को अभियुक्त द्वारा अपनी रक्षा में किया गया है प्रथम पहलू ऐसी स्थिती विधमानता को साबित करने से जिसके अंतर्गत मामला दण्ड संहिता की धारा 92 की परधि के भीतर आ जाता है यह सत्य है कि किसी अपराध के कारित किये जाने को साबित किये जाने का भार अभियोजन पक्ष पर होता है और यह भार किसी दुसरे पक्ष पर नहीं जाता है यह प्रतिपादना उतनी ही स्थिर है जितनी ही आश्य अभियुक्त अपराध कार्य कारित करने का संघठक है वह संघठक भी सिद्ध करना चाहिए यह कहने से कोई लाभ नहीं है कि सामान्यत: किसी व्यक्ति का आश्य मामले की परिस्थतीयों से निकाला जाता है इसका यह अर्थ भी हुआ कि यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्तिी पर जान बुझकर हमला करता है और व्यक्ति को छति होती है तो शरीर पर वार किया गया है उसके आधार पर यह उपधारित करना युक्ति युक्त होगा कि अभियुक्त का आश्य उसी प्रकार का होगा।