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kuldeeppal
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अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि उनमें एक ग्रुप ऐसा तैयार हो रहा है जिसने कहा अब हम यही करेंगे और ढ़ांचे पर धावा बोल दिया ढांचा तोड़ दिया यह बुरा हुआ लेकिन इसकी देश में जो प्रतिक्रिया हुई है, और विदेश में जो प्रतिक्रिया हुई है जरुरत से ज्यादा है इसके लिए हमारा जो दृष्टिकोण है इन समस्याओं की ओर देखने का और हमारी सरकार का जो रवैया है वह भी कम मात्रा में दोषी नहीं है। हमने दुनिया को यह नहीं बताया है कि यह विवादित ढांचा खड़ा है हमने यह नहीं कहा कि मस्जिद का ढांचा खड़ा है। मगर वहां एक मंदिर भी है जिसमें पूजा होती है, और यह झगड़ा 500 सालों से चल रहा है उन्हें पता नहीं है कि इस बार गिराने में जो अभिशेष निकले हैं वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि वहां पहले मंदिर था अगर ऐसी जगह है तो क्या सद्भावना से यह मामला हल नहीं होना चाहिए अगर पाकिस्तान में, बांग्लादेश में, मंदिर तोड़े जा रहे हैं तो वह इस्लाम के खिलाफ नहीं है, तो फिर क्या देश में जो मंदिर तोड़े गए वह इस्लाम के खिलाफ नहीं हुए और इसलिए मैं औरंगजेब को या मंदिर तोड़ने वालों को इस्लाम का सही प्रतिनिधि नहीं मानता मगर हम आशा करते थे कि यहां रहने वाले मुस्लिम बंधु कहेंगे कि उस समय ज्यादती हुई लेकिन उन्होंने नहीं कहा वे अड़े रहना चाहते हैं और इसलिए सिलसिला जारी है । इस बीच में देश में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिन्होंने हिन्दु मानस को, हिन्दु मानसिकता को प्रभावित किया है चाहे वह पंजाब में हिंसा पर उतारू होने वाले आंदोलन हों, चाहे वह कश्मीर में पृथ्कतावादी आवाज हो चाहे असम में घुसपैठियों के कारण एक गंभीर परिस्थिति का उत्पन्न होना हो बहुसंख्यक समाज के मन में यह भावना पैदा हो रही है कि हमारे देश में आखिर यह हो क्या रहा है ? साहबानों के मामले ने इसको और बदतर कर दिया है मैंने संविधान परिषद की बहसें बड़ी गहराई से पड़ी हैं। मगर मुस्लिम लीग के सदस्य आज के सदस्य पहले के सदस्य यही कहते रहे कि शादी ब्याह के कानून में हम किसी तरह का भारत राज्य का भारत गणराज्य का संसद का कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे क्यों नहीं करेंगे नागरिकता एक नहीं होगी क्या परिवार नियोजन भी लागू नहीं किया जाएगा क्या वह धर्म के आधार पर मजहब के आधार पर बदलेगी इसका मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ इंदौर की एक बूढ़ी महिला का केस सुप्रीम कोर्ट में चला गया उसने एक फैसला दे दिया और कांग्रेस पार्टी ने बैठक करके तय कर लिया कि कामन सिविल कोर्ड होना चाहिए बाद में कांग्रेस पार्टी बदल गयी क्या यह तुष्टिकरण की नीति नहीं है क्या बहुसंख्याक समाज की कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है एक व्यक्ति अपने साथ धर्म सत्यार्थ प्रकाश की एक प्रति लेकर एक मुस्लिम देश को गया हवाई अड्डे पर सामान देखा गया प्रति पकड़ ली गयी और उसे जेल में बंद कर दिया गया। श्री मान नेहरू जी ने अलीगढ़ मुस्लिम युर्निसर्सिटी के विधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा था आप मुस्लमान हैं मैं हिन्दु हूं मगर इस देश की जो सांस्कृतिक विरासत है वह आपको पुलकित करती है इस अभागे देश में अभी भी वन्दे मातरम का विरोध हो रहा है इस देश में कभी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं रहा लेकिन अब वे आसार दिखाई दे रहे हैं। आप एक तरह की कट्टरता के साथ समझौता करके उसे बढ़ावा देकर दूसरी तरह की कट्टरता नहीं रोक सकते ढ़ांचा ध्वस्त होने पर मुझे खेद है ऐसे प्रश्नों का समाधान शांति होना चाहिए चर्चा से होना चाहिए लटका के नहीं रखा जाना चाहिए इस मशले को अदालत में लटकाया प्रधानमंत्री के साथ बातचीत हुई थी ऐसा नहीं होना चाहिए था।