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DeepakKevre


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जंगल में सभी जानवर हिलमिल कर रहते थे। लेकिन वे सब जंगल के राजा शेर से परेशान रहते थे। कारण यह था कि वह एक दिन में कई जानवरों को मार देता था। इससे वे सभी दु:खी थे। एक दिन उन सबने मिलकर विचार किया कि किस प्रकार शेर के आतंक से मुक्ति पाई जाय। सभा मे यह निर्णय लिया गया कि प्रतिदिन एक जानवर शेर के पास उसके आहार के लिए चला जाया करेगा। इस प्रार्थना को लेकर शेर के पास गये। शेर ने प्रसन्नता से उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। उस दिन से रोज बारी-बारी से एक जानवर शेर के पास जाने लगा। एक दिन एक खरगोश की बारी आई। वह शेर के पास धीरे-धीरे चला। रास्ते में उसे एक कुआँ दिखाई दिया। उसने झाँक कर देखा तो उसमें उसकी परछाई दिखाई दी। उसने कुछ सोचा और शेर की तरफ चल दिया। देरी होने के कारण शेर भूख से परेशान था। उसने खरगोश से गुस्से से पूछा- इथनी देर से क्यों आया है? एक तो बहुत छोटा है फिर भी देर से आया है। खरगोश काँपते हुए बोला, उसने मुझे रोक लिया और खाना चाहा। मैं बड़ी मिन्नत करके दुबारा लौटने का वायदा करके आपके पास तक आय पाया हूँ। इस पर शेर और क्रोधित हुआ। वह खरगोश के साथ दूसरे शेर से भिड़ने चल दिया। खरगोश उसे उसी कुएँ के पास ले आया। खरगोश ने कहा- स्वामी! आपसे डर कर वह इस गुफा में छुप गया है। शेर ने कुएँ में झाँककर देखा तो उसकी परछाई दिखाई दी। शेर दहाडा तो उसे कुएँ में से दहाड़ भी सुनाई पड़ी। वह तुरन्त कुएँ में कूद पड़ा और मर गया। इधर खरगोश खुशी से नाचने लगा। यह बात उसने सभी जनवरों को सुनाई। सभी ने खरगोश की चतुराई के लिए उसकी प्रशंसा की। इस प्रकार शेर के आतंक से उनको मुक्ति मिल गई। शिक्षा-बुद्धि में बहुत बल होता है।
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