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जानते हैं कि देश का विभाजन मुख्‍य रूप से द्वि-राष्‍ट्र सिद्धांत के आधार पर हुआ, लेकिन कम लोग जानते हैं कि कश्‍मीरी अलगाववाद उसी विभाजन की अधूरी रह गई लड़ाई का हिस्‍सा है। ऐसा वरिष्‍ठ अलगाववादी और तहरीक-ए-हुर्रियत के कश्‍मीरी नेता सैयद अलीशाह गिलानी कई बार बोल चुके हैं। आप उनके इन उद्घोषों को अनसुना करें- हम पाकिस्‍तानी हैं, पाकिस्‍तान हमारा है या यहां सेक्‍यु‍लरइज्‍म नहीं चलेगा, नैशनलिज्‍म नहीं चलेगा, समाजवाद नहीं चलेगा यहां सिर्फ और सिर्फ इस्‍लाम चलेगा। इन्‍हीं साहब का यह भी कहना है- यह लड़ाई आजादीबराए इस्‍लाम है यानी आजादी की लड़ाई इस्‍लाम के लिए है। एक यही नेता हैं, कश्‍मीर में जो साफगोई से बात करते हैं। बाकी सब घूमा-फिरा कर बात करके गुमराह करने वाले शातिर लोग हैं। अन्‍य अलगाववादी कश्‍मीर को विवादित बताएंगे। जनमत-संग्रह कराने या राष्‍ट्र संघ का प्रस्‍ताव लागू कराने की मांग से इसे जोड़कर भारत राष्‍ट्र पर वादाखिलाफी का आरोप लगाएंगे। नेशनल कॉन्‍फ्रेंस, पीडीपी आदि मुख्‍यधारा की राजनीतिक पार्टियां इसके विलय को भारतीय संविधान की धारा 370 और आजकल 35-ए की शर्त के साथ जोड़कर दलीलें देंगे। नेशनल कांन्‍फ्रेंस आटोनॉमी की बहाली और पीडीपी सेल्‍फ रूल, विसैन्‍यीकरण आदि की मांग से अवगत कराएगी। परंतु आपको समझने में देर नहीं लगेगी कि सारी राजनीति मुस्लिम बहुल अस्मिता केंद्रित है, जिसे चालू मुहावरे में कश्‍मीरियत कहकर पेश किया जाता है। यह कश्‍मीरियत अतीत बन चुकी है एक दिवंगत अवधारणा है। रहस्‍यवादी संत कवि अहद जरगर, स्‍वच्‍छ काल से लेकर महजूर और दीनानाथ नादिम तक का कश्‍मीर आज वहां नहीं है। कभी महजूर ने अपनी एक कविता में दंगे फसाद छोड़कर आपसी सौहार्द की वकालत करते हुए हिंदू को शक्‍कर और मुसलमान को दूध की तरह परस्‍पर घुल-मिलकर शरबत की तरह रहने की बात की थी। यह अलग कि उन्‍हीं महजूर का यह अंतर्विरोधी काव्‍यांश जुव जान वंदहा हा हिन्‍दोस्‍तानस, दिल छुम पाकिस्‍तानस स‍ीथ' अर्थात जी जान न्‍यौछावर हिन्‍दुस्‍तान पर दिल मेरा पाकिस्‍तान के साथ भी समाज में समानांतर चलता रहा। आज वहां अब्‍दुल अहद आजाद जैसा कोई कवि नहीं जिसने बआवाज बुंलद कहा था- गीता की मुझे खता बताओ, ओकुरआन वाले। यह ऐसा ही भावबोध हुआ करता था जो कभी कश्‍मीर के जनजीवन का पायदान हुआ करता था इसे अपवादों के बावजूद आप कश्‍मीरियत कर सकते थे। आज वही कश्‍मीरियत ढकोसला है। इस्‍लामिक का मुखौटा है। महजूर के कथित शक्‍कर के आज वहां सब को परहेज है। कश्‍मीरी पंडितों से विहीन कर दिया गया कश्‍मीर आज मुस्लिम कश्‍मीर में बदल दिया गया है। इसे इस्‍लामी राज्‍य में बदलने में संबंधित लोग आमादा है।
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