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िश्‍व के अधिकांश देशों में जहां उम्रदराज लोगों में आत्‍महत्‍या के मामले अधिक मिलते हैं, वहीं भारत के युवाओं में ऐसी प्रवृत्ति अधिक है। 15-29 वर्ष की आयु में होने वाली आत्‍महत्‍याओं का औसत, देश की कुल आत्‍महत्‍याओं के औसत से तीन गुना अधिक है। इसके कारण पूरे विश्‍व की तुलना में भारत के युवाओं में आत्‍महत्‍या के सबसे अधिक मामले मिलते हैं। युवाओं के बीच भी महिलाओं में आत्‍महत्‍या का प्रतिशत अधिक है। जबकि पूरे विश्‍व में पुरूषों की आत्‍महत्‍या के अधिक मामले मिलते हैं। महिलाओं के बीच यह विवाहिताओं में अधिक देखने को मिलता है। भारतीय विवाहिताओं में आत्‍महत्‍या की दर अधिक होने के पीछे ससुराल वालों और पति द्वारा किया जाने वाला मनोवै‍ज्ञानिक और शारीरिक अत्‍याचार मुख्‍य है। उत्‍तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में लिंगभेद अपेक्षाकृत कम है। फिर भी वहां युवा महिलाओं की आत्‍महत्‍या की दर उत्‍तर भारत की अपेक्षा अधिक है। भारत में आत्‍महत्‍याओं को दूसरा मुख्‍य कारण आर्थिक संकट माना जाता है। किसानों में होने वाली आत्‍महत्‍याओं की खबरें आए दिन सुनाई देती रहती हैं। वास्‍तव में, गैर कृषि-कर्म करने वालों में आत्‍महत्‍या के मामले अधिक होते हैं। अत: हाल ही में किए गए अध्‍ययनों में निर्धनता को आत्‍महत्‍या का बहुत बड़ा कारण नहीं माना गया है। शिक्षित और संपन्‍न लोगों में आत्‍महत्‍या के अधिक मामले देखने में आते हैं। जापान जैसे संपन्‍न देश में प्रति लाख व्‍यक्तियों पर होने वाली 20 आत्‍महत्‍याओं की संख्‍या सर्वाधिक है। इसके बाद स्विटजरलैण्‍ड का नंबर आता है। भारत में यह प्रति लाख व्‍यक्तियों पर 11 है। दक्षिण भारत में धनी संपन्‍न राज्‍यों में आत्‍महत्‍याओं की संख्‍या, उत्‍तर भारत के गरीब राज्‍यों की तुलना में 10 गुना अधिक है। अपने आर्थिक स्‍तर में गिरावट को बर्दास्‍त कर पाना आत्‍महत्‍या का एक बड़ा कारण माना जा सकता है।
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