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santoshsahu
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प्राचीन काल मे हमारा भारत सोने की चिडि़या कहा था। लेकिन हमारे साने की चिडि़या कहलाने वाले भारत को किसी देश की नजर लग गयी। हमारे भारत को बर्वाद करने के पीछे हमारे ही देश पुत्रों का हाथ था। कुछ लोग पैसे के द्वारा बिक जाते है। वे अपने कर्तव्य को भूल जाते
है। कि हम एक स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक है। अगर हम अपने निजी स्वर्थ के लिए अगर बिक गये तो बहुत ही बड़ी हिंसा की महामारी हमारे देश में घुस जायेगी। और अंतोगत्वा इस महामारी की चपेट मे हम या हमारा ही परिवार फस जायेगा। लोगो का जीना हराम हो जायेगा। हिंसा से सब कोई डरता है। यह एक ऐसी आग है जिससे एक आदमी शांति की जिन्दगी नही गुजार पायेगा। प्रकृति भी यह नही चाहती है कि हिंसक औजारो से मौसम गंदा हो और मानव तथा अन्य जीव जन्तु को सांस लेने तक में दिक्कत जाये। इसलिये प्रकृति ने समय-समय पर एक से बढ़कर एक महायोद्धा, ज्ञानी पुरूषों को जन्म दिया और मानव को हिंसा के आग से बचाया। एक बार जब मकदुनियां के राजा सिकंदर को भनक लगी कि भारत बहुत ही अमीर देश है, तो उसने भारत को जीतने की सोची और उसने भारत पर आक्रमण किया। लेकिन सिकंदर भारत को जीतने मे सफल न हुआ। क्योकि प्रकृति ने उस समय भी भारत पर अनोखे बीर पुत्रों को जन्म दिया। जिनमे से चन्द्रगुप्त,और उसके अद्वितीय गुरू चाणक्य प्रमुख थे। आचार्य चाणक्य ने भी अपने काफी शिष्य बनाये जो सिकंदर की पराजय का कारण बने। इस तरह भारत भूमि बीरो से कभी खाली नही हुई। यहां पर बहुत प्रतापी राजा हुए जो अपनी मात्रभूमि की रक्षा के लिये अपने शीस कटवा दिये लेकिन झुके नही थे। वर्तमान में भी प्रकृति ने मानव को हिंसा को बचाने के लिये कई महापुरूषों को जन्म दिया है जिनमें से कुछ इस प्रकार है- मान्यनीय नरेन्द्र मोदी, अटल बिहारी बाजपेयी, योगी आदित्य नाथ तथा कुछ इस प्रकार रहे थे- स्वामी बिवेकानन्द,महात्मा गांधी,दयानंद सरस्वती,रानी लक्ष्मी बाई,और महाराजा छत्रछाल आदि है। जिन्होने अपने कौशल के दम पर शत्रुओ को नाकों चने चबवा दिये।
इसतरह हमारा भारत देश बीरों का देश रहा है इससे शत्रुता करने से पहले पड़ोसी देश सौ बार सोचता अवश्य है। इस तरह मेरे प्यारे दोस्तो हमे अपने बुद्धि, ज्ञान कौशल से अशिक्षित लोगो को अपने देश के प्रति जागरूक करना है, हमे चाहिये कि हम अपने ज्ञान को दूसरों में बाटते रहना चाहिये। क्या पता हमारे द्वारा कब किसका भला हो जाये? हमे अपने ज्ञान को बटते रहे ताकि जो अज्ञानी लोग है वो किसी का अहित न कर सके। क्यों कि अज्ञानी व्यक्ति दूसरों का हित कर ही नही सकते।
अत: हमे फिर से भारत को विश्व गुरू बनाना होगा ताकि सभी लोग सुकून की जिन्दगी जी सके।