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सन 1994 में सदर-बाजार के थाने शहबाजनगर पुलिस चौकी में तैनात रहे सिपाही शेरू सह एवं रजनेश पाल को अपर जिला जज प्रदीप चौरसिया ने तीन-तीन साल की कैद एवं 10-10 हजार रूपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। एक सिपाही हर प्रसार कटियार की मुकदमे के दौरान मौत हो गयी थी। तीनों सिपाहियों के उत्पीड़न से तंग आकर शहबाज नगर के दो ग्रामीणों प्रेमलाल एवं विजय ने जरह खाकर आत्महत्या कर ली थी। दोनों ग्रमीणों की मौत के बाद तीनों सिपाहियों द्वारा शहबाजनगर के दस ग्रामीणों से जबरन सफाई, चौकीदारी जैसे काम कराने का मामला उजागर हुआ था। सामाजिक कार्यकर्ता फकीरे लाल भोजवाल ने मामले की शिकायत तत्कालीन कमिश्नर से की थी। कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम अनवारुल हक ने मजिस्ट्रेट जांच की तो फकीरे लाल की शिकायत सच निकली। उसके बाद तीनों सिपाहियों के खिलाफ सदर-बाजार दस-दस हजार रुपये अर्थ दंड से अदालत ने दंडित किया है। मुकदमें की सुनवाई के दौरान हरप्रसाद की मौत हो गयी। इस संबंध में फकीरे लाल भोजवाल ने बताया कि गरीबों को बंधक बनाकर जबरन काम कराते थे, जिसमें दो ग्रामीणों ने आत्महत्या कर ली थी, उनको न्याय दिलाने के लिए छह माह तक आंदोलन चला था। उन्होंने कोर्ट के निर्णय की सराहना की।भारत का कोई भी नागरिक संबंधित विषय पर जानकारी मांगने वाले विभाग के साथ आरटीआई दर्ज कर सकता है। उदाहरण के लिए, इस मामले में, मांग की गई जानकारी फ़ाइल को साफ़ करने के लिए अवधि से संबंधित हो सकती है या फाइल को संसाेधित क्यों नहीं किया जा रहा है। आवेदन अंग्रेजी और हिंदी दोनों में लिखा जा सकता है। आवेदन संबंधित प्राधिकारी के पते पर ईमेल, पोस्ट या व्यक्तिगत रूप से वितरित किया जा सकता है। आवेदन को सरकारी विभाग के एक जन सूचना अधिकारी को संबोधित करने की जरूरत है। इनमें से अधिकतर जानकारी उस संबंधित विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अब आप केंद्र सरकार के साथ ऑनलाइन आरटीआई आवेदन भी दर्ज कर सकते हैं। एक बार जानकारी प्राप्त हो जाने के बाद, अधिकारी को जानकारी प्रदान करनी चाहिए या जितनी जल्दी हो सके या अधिकतम 30 दिनों के भीतर अनुरोध को अस्वीकार कर देना चाहिए।