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harshverma1485988
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बेहतर जीवन की बाधाएँ अनेक ओर अलग-अलग क्रिस्म की होती है। जाहिर है, एक तो डर है। सचमुच बहुत बड़ी बाधा। और डर के साथ सतर्कता भी है। उचित सतर्कता में समझदारी है, लकिन जरूरत से ज्यादा सतर्क न बनें। डरे हुए, कातर और अतिरिक्त सावधान लोग उन बाधाओं को कभी नहीं लाँघ पाते है, जिनके पार इस दुनिया के सचमुच अद्भुत जीवनमूल्य होते हैं। सच तो यह है कि बहुत ज्यादा सतर्कता आपके लिए बुरी है। एक दिन हमारे फार्म पर ऑइल का एक ट्रक डिलिवरी देने आया। लेकिन मैंने देखा कि ड्राइवर ट्रक से नहीं उतरा। मैं वहाँ तक चलकर गया और पूछा, क्या हुआ?
घबराकर उस आदमी ने जवाब दिया, उस कुत्ते को देखें। हमारे पास एक बड़ा कुत्ता है, जो बहुत सामान्य है। बस उसके भौंकने की आवाज तेज है और वह थोड़ा डरावना दिखता है। लेकिन हकीकत में वह इसका नाटक करता है। उसके पास बस तेज आवाज और डरावना दिखता है। लेकिन हकीकत में वह इसका नाटक करता है। उसके पास बस तेज आवाज और डरावना रूप ही है। मैंने कहा, अरे वह कुत्ता तो मक्खी को भी नुकसान नहीं पहुँचाएगा। मेरी दिलचस्पी मक्खियों में नहीं है, उस आदमी ने जवाब दिया। मेरी दिलचस्पी तो इस बात में है कि वह मुझे काट न ले। देखिए मैंने कहा, अगर आप ट्रक से उतरकर उस कुत्ते के पास जाएँगे, तो वह रफूचक्कर हो जाएगा। लेकिन वह कोई जोखिम नहीं लेने वाला था। उसने कहा, उसकी आँखों को देखे। नहीं, धन्यवाद! और वह जहाँ था, वहीं बैठा रहा। मैं कुत्ते की ओर मुडा और उसे आदेश दिया, दूर जाओ, पीट! दूर जाओ! लेकिन मुझे हैरानी हुई और थोड़ी शर्म भी आई, जब वह भौंकता हुआ मेरे पास आ गया। एक पल के लिए तो मैं खुद ट्रक पर कूूदने वाला था। पीट जानता था कि उसने डिलिवरी वाले आदमी को डरा दिया था और वह यह देखने वाला था कि वह मुझे भी डरा सकता है। मैंने उस आदमी से कहा, आप इस कुत्ते से डर रहे हैं, और वह यह बात जानता है, इसलिए उसने ठान लिया है कि वह आपको इस ट्रक में ही बेठाए रहेगा।