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केंद्र सरकार ने माना, सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कैग रिपोर्ट में जमा नही हुए तीन पेज
नई दिल्ली । राफेल मामले की सुनपाई के दौरान अपनी चूक स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कैग रिपोर्ट में शुरुआती तीन पेज नहीं थे। इसके बाद ये पेज दाखिल कर दिए गए। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप दस्तावेज के विशेषाधिकार की बात कर रहे हैं लेकिन इसके लिए आपको सही तर्क पेश करने होंगे। लीक हुए गोपनीय दस्तावेज को लेकर केंद्र के विशेषाधिकार के दावे पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा दस्तावेज के विशेषाधिकार का जिक्र करने पर जस्टिस केएण जोसेफ ने कहा कि जिन दस्तावेजों की बात हो रही है, हम उनके बारे में जानते ही नहीं हैं।
उनमें ऐशा केया है जिसे हम भी नहीं देख सकते हैं। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इन्हें देखा जा सकता है। इस डील में साफ है कि यह सरकारों के बीच का सौदा है, इसलिए दाम बताना उचित नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा 2जी मामले भी ऐसा ही हुआ था । किसी अनजान व्यक्ति ने तत्कालीन सीबीआई प्रमुख के घर का एंट्री रजिस्टर दिया था। उन्होंने 2जी और कोल घोटाले के संबंध में आरोपियों की बैठकों का भी जिक्र किया लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को मानने से इनकार कर दिया। इस पर भूषण ने कहा कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है, इसलिए सरकार चाहती है कि कोर्ट इसमें दखल न दे।
कुछ मामलों में संवेदनशील दस्तावेज का भी खुलासा करना होता है