words per minute
5
SatendraSingh2
00:00
Speed
आशीष और रोहित के घर आपस में मिले हुए थे। रविवार के दिन वे बडे सवेरे उठते थे। रविवार के दिन वे बडे सवेरे उठते ही बगीचे में आ गए। तो आज कौन सा खेल खेलें रोहित ने पूछा। वह छह का था और पहली में पढता था। कैरम से तो मेरा मन भर गया क्यों न हम खेले आशीष ने कहा। वह भी रोहित के साथ पढता था। मगर उसके लिये तो ढेर सारे साथियों की जरुरत होगी और हमारे तुम्हारे सिवा कोई है ही नहीं। वे कुछ देर सोचते रहे फिर आशीष ने कहा, चलो गप्पें खेलते है। गप्पें भ़ला यह कैसा खेल होता है रोहित को कुछ भी समझ में न आय़ा। देखो मैं बताता आशीष ने कहा। हम एक से बढ़कर एक मज़ेदार गप्प हाकेंगे। ऐसी गप्पें जो कही से भी सच न हो। बजा मज़ा आता है इस खेल में। चलो मैं ही शुरू करता। यह जो सामने अशोक का पेड़ है ना रात में बगीचे के तालाब की मछली इस पर लटक कर झूला झूल रही थी। रंग बरिंगी मछली से यह पेड़ ऐसा जगमगा कहा था मानो लाल परी का राजमहल। रोहित ने आश्चर्य से कहा, और मेरे बगीचे में जो पेड़ है ना इस पर चंदामामा सो रहा था। चारों ओर ऐसी प्यारी रोशनी झर रही थी कि तुम्हारे एशोक के पेड पर झूला झूलती मछली ने गाना गाना सुरु कर दिया। कौन सा गाना आशीष ने पूछा। वही चंदामामा दूर के। फिर क्या होता, मझली इतने जोर से गा रही थीं कि चंदामामा की नींद टूट गयी और वह धडाम से मेरी छत पर गिर गया। फिर फिर क्या था, वह तो गिरते ही फूट गया। हाय, सच! चन्दामामा फूट गया तो फिर उसके टुकडे कहां गये आशीष ने पुछा। वे तो सब सुबह-सुबह सूरज ने कर जोड़े और उनपर काले रंग का मलहम लगा दिया। विश्वास न हो तो रात में देख लेना चंदामामा पर काले धब्बे जरूप दिखाई देंगे। अच्छा ठीक है मैं रात में देखने की कोशिश करता। आशीष ने कहा। वह एक नहीय गप्प सोच रहा ता। याद आया, आशीष बोला, पिछले साल जब तुम्हारे पापा का नही हुआ था तो एक दिन खूब जोरों की बारिश हुई। इतनी वारिश की पानी रस्से की तरह गिर रहा था। पहले तो मैं उसमें नहाया फर पानी का रस्सा पकड कर ऊपर चढ़ गया। पता है क्या था रोहित ने पूछा। धूप खिली हुई थी। धूप में नन्हे घर थे। एक घर के बगीचे में सूरज आराम से हरी घास पर लेटा आराम कर रहा था और नन्हे सितारे धमाचौकडी मचा रहे थे सितारे भी कभी धमाचौकडी मचा सकते हैं रानी दीदी ने टोंक दिया। न जाने वो कब आशीष और रोहित के पास आ खडी हुई थीं और उनकी बातें सुन रही थी। अरे दीदी, हम कोई सच बात थोड़ी कह रहे है। रोहित ने सफाई दी। अच्छा तो तुम झूठ बोल रहे हो रानी ने धमकाया। नहीं दीदी, हम तो गप्पे खेल रहे हैं और हम खुशी के लिए खेल रहे है।