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bhupendra5757
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एक बार की बात है राजा कृष्णदेव के दरबार में राजा भोज का आयोजन किया गया कई प्रकार के भोज और कई प्रकार की मिठाई और पकवानों को बनवाना चाहिए हर कोई खुश हो जाता है वह सब वहां नजर आ रहे थे वह समय भी आ गया जब भो शुरू हो गया और भोजन के बाद दरबार सज गया। राजा दरबारियों से बोले भोजपुरी अभी समाप्त नहीं हुआ है लीजिए बहुत दूर से मंगवाए गए आम का आनंद लीजिए और नौकरों के द्वारा सभी व्यक्तियों को एक आम दिया गया तेनालीराम बोला वाह महाराज मजा आ गया आम की बात ही कुछ और है। राजा मुस्कुराते हुए बोले तेनालीराम चाहो तो और आम ले लो यह सुनकर तेनालीराम छठ से दूसरे आमो पर टूट पड़ा तेनाली राम की बातें सुनकर मंत्री और सेनापति अपना मुंह पिचकाने लगे सेवक मिठाई का स्थान ले आए मिठाई की ओर देखते हुए राजा बोला यह बहुत ही अच्छी मिठाई है इसे बनाने वाला हलवाई भी दूर देश से आया है। तेनालीराम ने दोनों हाथों से मिठाई उठा ली राजा हंसते हुए तेनालीराम और मिठाई ले लो तेनालीराम में थाल से दोबारा मिठाई ले ली एक अन्य सेवक मिठाई का बड़ा सा स्थान लेकर आया तेनालीराम हंसते हुए अब यह क्या है महाराज मुस्कराते हुए बोला यह पाना एकदम शहद की तरह मीठे हैं तो घर के लिए भी एक बनवा लेना और घर ले जाना तेनालीराम बोला ठभ्क है महाराज जैसी आपकी इच्छा यह सब देखकर दरबार में बैठा एक और मंत्री बोला तेनालीरामा पेट है या कुआं तुम अपनी इच्छा पर नियंत्रण क्यों नहीं रखते हो। कुछ तो दिमाग से काम लिया करो दरबार का एक और मंत्री बोला तेनालीराम को पता ही नहीं चला कि महाराज दरबारियों की जीत को परख रहे हैा तेनालीराम तो जन्मों से भूखा ही लगता है यह सुनकर सब हंस पड़े और मंत्री की बात से सब सहमत हो गए।