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VikasGupta6768
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इस बात से तो कोई इनकार नहीं करता कि मिशन शक्ति की सफलता के साथ अंतरिक्ष में शत्रु के उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल कर भारत अब दुनिया की एक बड़ी अंतरिक्ष शक्ति बन गया है। हमारे अंतरिक्ष व रक्षा विज्ञानियों की इस बड़ी कामयाबी से पूरी दुनिया चौंक गई है, क्योंकि अभी तक सिर्फ रूस, अमेरिका और चीन के पास ही यह क्षमता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों को बताया कि हमारे वैज्ञानिकों ने मिशन शक्ति के तहत उपग्रह रोधी प्रक्षेपास्त्र के जरिए 300 किलोमीटर ऊपर निम्न कक्षा में एक उपग्रह को सफलतापूर्वक मार गिराया है। यह एक बहुत ही कठिन मिशन था, लेकिन इसे सिर्फ तीन मिनट के अंदर ही पूरा कर लिया गया। नि:संदेह अंतरिक्ष के क्षेत्र में हासिल यह उपलब्धि हम सभी देशवासियों के लिए एक बड़े गौरव का पल है और इस शानदार सफलता का श्रेय भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन और इसरो के वैज्ञानिकों को जाता है, जो पिछले कई वर्षों से इस मिशन को सफल बनाने में जुटे हुए थे। कहना होगा कि उपग्रह-रोधी मिसाइल के सफलत परीक्षण के साथ भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान ने बुलंदियों का एक और नया आयाम तय किया है। आज अंतरिक्ष में भारत के अनेक उपग्रह तैनात हैं, जो दूरसंचार, आपदा प्रबंधन, मौसम, कृषि और नेविगेशन आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार भारत के इस परीक्षण का उद्देश्य अपनी अंतरिक्ष संपदा की हिफाजत करना है। बाहरी अंतरिक्ष में देश के हितों की देखभाल करना भारत सरकार का दायित्व है। इस संदंर्भ में भारत के उपग्रह रोधी कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत ने इस अति-महत्वपूर्ण परीक्षण को तभी अंजाम दिया, जब उसे यह भरोसा हो गया कि वह इसमें पूरी तरह सफलता हासिल कर सकता है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा भी कि यह कार्यक्रम हमारी सुरक्षा को सुढृढ़ करेगा। भारत शुरू से ही अंतरिक्ष को युद्ध का अखाड़ा बनाए जाने के खिलाफ रहा है। इस स्थिति में आज भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत का इरादा बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ शुरू करने का कतई नहीं है।