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MayankNotani
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एक अहम खबर चुनाव के शोरगुल में गुम हो गई। अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन में अपील की है कि अब भारत को विकासशील देशों की सूची से निकालकर विकसित देशों की सूची में डाल देना चाहिए। वैसे तो यह खबर अच्छी दिखाई पड़ती है, लेकिन इसके पीछे अमेरिका की मंशा कतई अच्छी नहीं है। उसने चीन को भी विकसित देशों में शामिल करने को कहा है। उसका तर्क है कि इन दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और उनकी सामाजिक स्थिति में भी काफी बदलाव आ गया है। असल में दुनिया में प्रचलित अवधारणा के मुताबिक जिन देशों को सकल घरेलू उत्पाद प्रति व्यक्ति आय बेहतर होती है, औद्योगीकरण हो चुका होता है, जीवन-शिक्षा का स्तर उच्च श्रेणी का होता है, उन्हें विकसित माना जाता है। सिवाय तकनीकी विकास, आय का समान वितरण और औद्योगिक विकास अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार होने पर देश को विकसित माना जाता है। ये भी माना जाता है कि उच्च शिक्षित होने के वजह से विकसित देशों के नागरिक ज्यादा तार्किक होते हैं। सभी पैमानों पर भारत काफी पिछड़ा हुआ है। हमारे देश में बड़ी आबादी अभी भी पेयजल, शौचालय, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, गरीबी, कुपोषण, प्राथमिक शिक्षा और पक्की सड़कों जैसी आधारभूत जरूरतों के लिए परेशान है। हां, चीन की बात अलग है। भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन की प्रति व्यक्ति आय के पांचवें हिस्से के बराबर ही है। एक अनुमान के मुताबिक उसका प्रति व्यक्ति जीडीपी भी 10 हजार डॉलर का स्तर पार कर चुका है। फिर भी चीन चाहता है कि उसे विकासशील देशों में ही रखा जाए, क्योंकि ऐसे देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष लाभ मिलते हैं।