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MANISH1724841
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पानी भरते समय उसे कुएं के पास एक धारदार हथियार मिला, उसने सोचा कि वो इस हथियार से अपने दोस्त को मार देगा और गांव में कहेगा कि रास्ते में डाकुओं ने उस पर हमला किया था। मोती मन ही मन अपनी योजना पर खुश हो रहा था। वह पानी लेकर वापस पहुंचा और मौका देखते ही हीरा पर पीछे से वार कर दिया, देखते-देखते हीरा वहीं ढेर हो गया। मोती अपना सामान और सोने के सिक्के से भरा थेला लेकर वहां से वापस भागा। कुछ एक घंटे चलने के बाद वह एक जगह रुका दोपहर हो चुकी थी और उसे बड़ी भूख लग आई थी। उसने अपनी पोटली खोली और बड़े चाव से खाना खाने लगा। थोड़ा खाते ही मोती के मुंह से खून आने लगा और वो तड़पने लगा। उसे एहसास हो चुका था कि वह पानी लेने गया था तभी हीरा ने उसके खाने में कोई जहरीली जंगली बूटी मिला दी थी। कुछ ही देर में उसकी भी तड़प-तड़प कर मृत्यु हो गयी। अब दोनों दोस्त मृत पड़े थे ओर वो थैला यानी माया रूपी डायन जस का तस पड़ा हुआ था। जी हां दोस्तों उस साधु ने एकदम ठीक कहा था कि आगे डायन है, वो सिक्कों से भरा थैला उन दोनों दोस्तों के लिए डयन ही साबित हुआ। ना वो डायन रूपी थैला वहां होता न उनके मन में लालच आता और ना वे एक दूसरे की जान लेते।
दोस्तों यही जीवन का सच भी है। हम माया यानी धन-दौलत संपदा एकत्रित करने में इतना उलझ जाते हैं कि अपने दोस्त रिश्तों नातों तक को भूला देते हैं, माया रूपी डायन आज हर घर में बैठी है, इसी माया के चक्कर में इंसान हैवान बन बैठा है हमें इस प्रेरक कहानी से ये सीख लेनी चाहिए की हमें कभी भी पैसे को जरुरत से अधिक महत्व नहीं देना चाहिए और अपनी दोस्ती अपने रिश्तों के बीच में इसको कभी नहीं लाना चाहिए।