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म्‍पी मध्‍यकालीन हिंदू राज्‍य विजयनगर साम्राज्‍य की राजधानी था। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्‍पी (पम्‍पा से निकला हुआ नाम से जाना जाता है) और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्‍हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहां एक समृद्धशाली सभ्‍यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्‍य में स्थित यह नगर यूनेस्‍को के विश्‍व के विरासत स्‍थलों में शामिल किया गया है। हम्‍पी का इतिहास प्रथम शताब्‍दी से प्रारंभ होता है। उस समय इसके आसपास बौद्धों का कार्यस्‍थल था। बाद में हम्‍पी विजयनगर साम्राज्‍य की राजधानी बना। विजयनगर हिन्‍दुओं के सबसे विशाल साम्राज्‍यों में से एक था। हरिहर और बुक्‍का नामक दो भाईयों ने 1336 ई. में इस साम्राज्‍य की स्‍थापना की थी। कृष्‍णदेव राय ने यहां 1409 से 1429 के बीच हम्‍पी में शासन किया और अपने साम्राज्‍य का विस्‍तार किया। हम्‍पी में शेष रहे अधिकतर स्‍मारकों का निर्माण कृष्‍णदेव राय ने करवाया था। यहां चार पंक्तियों की किलेबंदी नगर की रक्षा करती थी। इस साम्राज्‍य की विशाल सेना दूसरे राज्‍यों से इसकी रक्षा करती थी। विजयनगर साम्राज्‍य के अंतर्गत कर्नाटक, महाराष्‍ट्र और आन्‍ध्र प्रदेश के राज्‍य आते थे। कृष्‍णदेव राय की मृत्‍यु के बाद इस विशाल साम्राज्‍य को बीदर, बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर और बरार की मुस्लिम सेनाओं ने 1465 में नष्‍ट कर दिया। कर्नाटक राज्‍य में स्थित हम्‍पी को रामायणकाल में पम्‍पा और किष्किन्‍धा के नाम से जाना जाता था। हम्‍पी को यह नाम यहां हम्‍पादेवी का मंदिर होने से मिला। हम्‍पादेवी मंदिर ग्‍यारहवीं से तेरहवीं शताब्‍दी के बीज बनवाया गया था। विजयनगर के प्राचीन भवनों का विस्‍तृत विवरण ने अपनी पुस्‍तक हम्‍पी रूइंस में दिया है। विट्ठल मंदिर हम्‍पी में विट्ठ मंदिर परिसर सबसे शानदार स्‍मारकों में से एक है। इसके मुख्‍य हॉल में लगे 56 स्‍तंभों को थपथपाने पर उनमें से संगीत लहरियां निकलती हैं। हॉल के पूर्वी हिस्‍से में प्रसिद्ध शिला रथ है जो वास्‍तव में पत्‍थर के पहियों से चलता था। हम्‍पी में ऐसे अनेक आश्र्चर्य हैं, जैसे यहां के राजाओं को अनाज, सोने और रूपयों से तौला जाता था और उसे गरीब लोगों में बांट दिया जाता था। रानियों के लिए बने स्‍त्रानागर मेहराबदार गलियारों, झरोखेदार छज्‍जों और कमल के आकार के फव्‍वारों से सुसज्जित होते थे। इसके अलावा कमल महल और जनानखाना भी ऐसे अश्र्चयों में शामिल हैं। एक सुंदर दो मंजिला स्‍थान जिसके मार्ग ज्‍यामितीय ढंग से बने हैं और धूप और हवा लने के लिए किसी फूल की पत्तियों की तरह बने हैं। यहां हाथी खाने के प्रवेश द्वार और गुबंद मेहरबदार बने हुए हैं और शहर के शाही प्रवेश द्वार पर हजारा राम मंदिर बना है। विरूपाक्ष मंदिर का कृष्‍णदेव राय ने निर्माण कराया था जो भगवान विष्‍णु को समर्पित है मंदिर का शिखर जमीन से 50 मीटर ऊपर है।
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