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RanaKamalSingh
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बहुत समय पहले की बात है, सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था, राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज संभाल सकें। इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला, पुत्रों हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है, मैं चाहता हूं तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओं कि वो कैसा होता है राजा की आज्ञा पर तीनों पुत्र बारी-बारी से गए और वापस लौट आये।
सभी पुत्रों के लौट आने पर राजा ने पुन: सभी को दरबार में बुलाया और उस पेड़ के बारे में बताने को कहा। पहला पुत्र बोला पिताजी वह पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा-मेढ़ा और सूखा हुआ था। नहीं-नहीं वो तो बिलकुल हरा-भरा था, लेकिन शायद उसमें कुछ कमी थी क्योंकि उस पर एक भी फल नहीं लगा था। दूसरे पुत्र ने पहले को बीच में ही रोकते हुये कहा फिर तीसरा पुत्र बोला, भैया लगता है आप भी कोई गलत पेड़ देख आये क्योंकि मैंने सचमुच नाशपाती का पेड़ देखा, वो बहुत शानदार था और फलों से लदा पड़ा था।
और तीनों पुत्र अपनी-अपनी बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे कि तभी राजा अपने सिंघासन से उठे और बोले पुत्रों, तुम्हें आपस में बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है, दरअसल तुम तीनों ही वृक्ष का सही वर्णन कर रहे हो, मैंने जानबूझकर तुम्हें अलग-अलग मौसम में वृक्ष खोजने भेजा था और तुमने जो देखा वो उस मौसम के अनुसार था। मैं चाहता हूं कि इस अनुभव के आधार पर तुम तीनों बातों की गांठ बांध लो।