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Himani1864556
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हमारे यहां देव संस्कृति में प्रकृति को शक्ति रूप में पूजा जाता है। व्यक्ति जब प्रत्येक कार्य में प्रकृति के नियम का पालन करता है तब वह सुखी और आरोग्य रहता है। लाल किताब में वृक्षों का क्या महत्व है और जातक की कुंडली के अनुसार कौन-कौन-सा वृक्ष लाभकारी है या नहीं, इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
लाल किताब में हर ग्रह किसी न किसी वृक्ष का कारक है और कुंडली में जो अच्छे ग्रह हैं उनके वृक्षों का घर के पास होना शुभ माना गया है। बृहस्पति ग्रह पीपल के वृक्ष का कारक है। यदि कुंडली में बृहस्पति शुभ हो और जिस भाव में बैठा है, मकान के उस हिस्से में या उस दिशा तरफ पीपल का वृक्ष लगाना शुभ फल देगा।
इस वृक्ष में कभी-कभी दूध डालते रहना चाहिए तथा उसके आसपास गंदगी नहीं रखना चाहिए। सूर्य तेज फल के वृक्ष का कारक है, जिस भाव में बैठा है, उस भाव की तरफ घर से बाहर या अंदर तेज फल का वृक्ष शुभ फलदायी होता है। शुक्र का कारक कपास का पौधा है और मनी प्लांट पौधा भी शुक्र का कारक है। कोई भी जमीन पर आगे बढ़ने वाली लेटी हुई बेल शुक्र की कारक है।
यदि शुक्र कुंडली में अच्छा है तो घर में मनी प्लांट लगाना अत्यधिक शुभ फलकारी है। आजकल के जमाने में घर अंदर से पूरी तरह पक्के होते हैं। इसलिए घर में शुक्र स्थापित नहीं होता है, क्योंकि शुक्र कच्ची जमीन का कारक है। इसलिए घर में कहीं भी कच्ची जमीन न हो तो मनी प्लांट लगाना शुभ फल का कारक है। मंगल नीम के पेड़ का कारक है, अतः भाव अनुसार नीम का पेड़ शुभ फल देगा।
केक्टस और किसी भी प्रकार के काँटे वाले पौधे घर में स्थापित करना शुभ नहीं होता है। केतु इमली का वृक्ष, तिल के पौधे तथा केले के फल का कारक है। यदि केतु खराब हो तो इन पौधों को घर के आसपास लगाना घर के मालिक के बेटे के लिए अशुभ फल का कारक हो जाता है, क्योंकि कुंडली में केतु हमारे बेटे को कारक भी है।
बुध का कारक केला या चौड़े पत्तों के वृक्ष है। शनि कीकर, आम और खजूर के वृक्ष का कारक है। इन वृक्षों को शुभ स्थिति में भी घर के आसपास स्थापित नहीं होने देना चाहिए। नारियल का पेड़ या आज के जमाने में केक्टस राहु के कारक हैं।
हमारी भारतीय संस्कृति में पेड़ों को देवता के रूप में पूजने की परंपरा रही है। ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक व्यक्ति की राशि का एक प्रतिनिधि वृक्ष होता है। इसके सान्निध्य और रोपण से शुभफल मिलता है।
वास्तु में राशि के अनुसार पेड़ लगाना सकारात्मक फलदायक माना जाता है। सभी लोगों को घरों में पेड़ लगाने के बारे में शुभाशुभ जानना आवश्यक होता है।
अष्टदिग्पाल वृक्ष : प्रत्येक दिशा में एक प्रतिनिधि वृक्ष दिग्पाल के रूप में दिशाओं की रक्षा करता है। आठ दिशाओं के प्रतिनिधि वृक्ष भवन तथा भूमि पर लगाने से मंगलकारी होते हैं।
इसके तहत उत्तर में जामुन, उत्तर पूर्व में हवन, उत्तर पश्चिम में सादड़, पश्चिम में कदम्ब, दक्षिण पश्चिम में चंदन, दक्षिण में आँवला पूर्व में बाँस तथा दक्षिण पूर्व में गूलर अष्टदिग्पाल वृक्ष पाए जाते हैं