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santoshsahu
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एक दिन भरे दरबार में राजा अकबर ने अपनी अंगूठी खो दी। जैसे ही राजा को यह बात पता चली उन्होंने सिपाहियों से ढूंढने को कहा पर वह नहीं मिली। राजा अकबर ने बीरबल से दुखी मन से बताया कि वह अंगूठी उनके पिता की अमानत थी जिससे वह बहुत प्यार करते थे। बीरबल ने जवाब में कहा। आप चिंता ना करें महाराज, मैं अंगूठी ढूंढ़ लूंगा। बीरबल ने दरबार में बैठे लोगों की तरफ देखा और राजा अकबर से कहा। महाराज चोरी इन्हीं दरबारियों में से ही किसी ने की है। जिसकी दाढ़ी में तिनका फसा है उसी के पास आपकी अंगूठी है।
जिस दरबारी के पास महाराज की अंगूठी थी वह चौंक गया और अचानक से घबराहट के मारे अपनी दाढ़ी को ध्यान से देखने लगा। बीरबल ने उसकी हरकत को देख लिया और उसी वक्त सैनिकों को आदेश दिया और कहा। इस आदमी की जांच की जाये। बीरबल सही था अंगूठी उसी के पास थी। उसको पकड़ लिया गया और कारागार में कैद कर दिया गया। राजा अकबर बहुत खुश हुये।
एक दिन राजा अकबर और बीरबल राज महल के बगीचे में टहल रहे थे। बहुत ही सुंदर सुबह का नजारा था। बहुत सारे कौवे तालाब के आस-पास उड़ रहे थे। कौवों को देखते ही बादशाह अकबर ने मन में एक प्रश्न उत्पन्न हुआ। उनके मन में यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि उनके राज्य में कुल कितने कौवे होंगे।
बीरबल तो उनके साथ ही बगीचे में टहल रहे थे तो राजा अकबर ने बीरबल से ही यह प्रश्न कर डाला और पूछा बीरबल, आखिर हमारे राज्य में कितने कौवे हैं। यह सुनते ही चालाक बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया। महाराज पूरे 95,463 कौवे हैं हमारे राज्य में। महाराज अकबर इतने तेजी से दिए हुए उत्तर को सुन कर हक्का-बक्का रह गए और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने का सोचा। महाराज ने बीरबल से दोबारा प्रश्न किया। अगर तुम्हारे गणना किये गए अनुसार कौवे ज्यादा हुये तो।
बिना किसी संकोच के बीरबल बोले हो सकता है किसी पड़ोसी राज्य के कौवे घूमने आये हों। और कम हुए तो। बीरबल ने उत्तर दिया, हो सकता है हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने किसी अन्य राज्यों के रिश्तेदारों के यहां घूमने गये हो।