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santoshsahu
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बेगम हजरत महल का असल नाम मुहम्मदी खनूम था। उनका जन्म सन् 1820 में, अवध प्रांत के फैजाबाद जिले में हुआ था। बेगम हजरत महल बचपन से ही काफी खूबसूरत थीं और काफी तेज दिमाग की थी। शुरुआती जीवन में उन्हें अवध के दरबार में गणिका के तौर पर नियुक्त किया गया था। उसके बाद बीतते दिनों के साथ ही राजमहल में उनकी पैठ बनती चली गई। गणिका के तौर पर कुछ समय काम करने के पश्चात उन्हें शाही हरम में एक ख्यासीन बनाकर रखा गया। गौरतलब है कि उन्हें उनके परिवार द्वारा बेच शाही तंत्र को बेच दिया गया था। ख्यासीन के बाद वे शाही हरम में परी के पद पर पदोन्नत हो गईं थीं। इसके बाद उन्हें अवध के आखिरी नवाब, वाजिद अली शाह ने अपनी बेगम बना लिया था। मुहम्मदी खनूम को उनके बेटे के जन्म के बाद बेगम हजरत महल के नाम से नवाजा गया।
आजादी के पहले आंदोलन के दौरान पूरा भारत अलग-अलग रियासतों में बंटा हुआ था और सभी रियासतदार भारत की नहीं अपितू अपनी रियासत की अंग्रेजों से आजाद कराना चाहते थे। आजादी का पहला आंदोलन सन् 1858 में हुआ और इस आंदोलन से जुड़ने वाले सभी लोगों के पास विद्रोह का अपना एक अलग कारण था। अवध की बेगम ने आराधना करने की स्वतंत्रता के लिए इस विद्रोह में हाथ डाले थे।