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vikaskumar1392589
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किसी समय बासलगढ़ राज्य में विक्रम सेन नामक राजा राज करता था। वह था तो बड़ा दयालु, लेकिन प्रत्येक कार्य को बिना विचारे ही करने का उसका स्वभाव बन गया था। उसके पास एक चिड़िया थी, जो उसे अत्यंत प्रिय थी। वह एक क्षण भी उससे अलग रहना पसंद नहीं करता था। चिड़िया भी साम्राट को बहुत चाहती थी। एक बार चिड़िया ने राजा से अपने संबंधियों से मिलने की इच्छा प्रकट की। राजा ने शीघ्र लौटने का निर्देश देकर उसे अनुमति दे दी। चिड़िया उड़ गई और अपने संबंधियों से मिलकर बड़ी प्रसन्न हुई। लौटते समय चिड़िया के पिता ने उसे साम्राट के लिए एक अमृत फल दिया।
चिड़िया खुशी-खुशी फल को लेकर उड़ चली, रास्ते में रात हो गई। अत: उसने विचार किया कि क्यों न पेड़ पर रात गुजार कर सुबह को महल पहुंचे। वह पास ही एक पेड़ पर बैठ गई।