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Abhishekk
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अभियोजन की कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि दिनांक 21.09.2012 को आहत नारायण मृतक सुभाष के साथ मोटरसाईकिल पर बैठकर इंदोर रोड से जा रहा था तब सड़क पर ग्राम दरगाह के पास रात्रि के लगभग 11 बजे जैसे ही वे लोग दरगाह के पास पहुंचे तो किसी गाड़ी के चालक ने तेज रफ्तार से गाड़ी को चलाते हुए उनकी मोटरसाईकिल को टक्कर मार दी, जिससे मोटरसाईकलि को नुकसान हुआ। आहत नारायण को मुंह व पैर में चोट आई तथा सुभाष की मौके पर ही मृत्यु हो गई। टक्कर मारने वाली गाड़ी कुछ देर रूकी फिर उसका चालक उसे तेजी से इंदौर तरफ भगाकर ले गया फिर ब्रेक लाईट में नारायण ने नंबर देखा। फिर रात्रि गश्त के दौरान थाना तत्कालीन आरक्षक रामबाबू तिवारी तथा आरक्षक बद्रीलाल जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने नारायण और सुभाष को पड़े हुए देखा। राहगीर जयराम ने मौके पर पड़े एक व्यक्ति को चेक किया तो देखा कि वह व्यक्ति को चेक किया तो देखा कि वह व्यक्ति उसका पुत्र सुभाष है जिसकी मृत्यु हो चुकी थी। फिर दोनों आहतगण को लेकर रामबाबू तिवारी थाने आये और दोनों आहतगण मृतक को अस्पताल भेजा तथा थाने पर धारा 279, 337 एवं 304 भादस. के अंतर्गत अपराध क्रमांक 358/05 पंजीबद्ध किया। विवेचना के दौरान घटना स्थल पर मौका नक्शा बनाया गया, मृतक का शव पंचनामा बनाया गया, आहत नारायण का चिकित्सीय परीक्षण तथा मृतक सुभाष का शव परीक्षण कराकर चिकित्सीय दस्तावेज अभिप्राप्त किये गये। साक्षीगण के कथन लेखबद्ध किये गये, जप्ती पंचनामे अनुसार जप्ती की गई, अभियुक्त को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी पंचनामा बनाया गया, जप्तशुदा वाहन की मैकेनिकल जांच कराई गई, आहतगण की मोटरसाईकिल नुकसानी पंचनामा बनाया गया। तदोपरांत अभियोगपत्र न्यायालय में पेश किया गया। अभियुक्त ने उस पर आरोपित ने उस पर आरोपित अपराध कारित करना अस्वीकार किया है एवं धारा 312 द.प्र. स. के परीक्षण के दौरान मिथ्या रूप से अभियोजित किया जाना कथित किया है। अभिलेख पर घटना के प्रत्यक्ष साक्षी के रूप में अभियोजन द्वारा नारायण सिंह अ.सा. के कथन कराये गये है जिसके अनुसार वर्ष 2005 के दिसम्बर की घटना है, रात के 14 बजे की बात है नारायण काम करने के लिए मोटरसाईकिल से जा रहा था। तब बाबा की दरगाह के सामने इंदौर रोड पर नारायण का एक्सीडेण्ट हो गया था। नारायण ने कपड़ा बांध रखा था इसलिए वह देख नहीं पाया था कि एक्सीडेण्ट किस गाड़ी से हुआ था। टक्कर मारने वाली गाड़ी कौन चला रहा था यह भी उसने नहीं देखा था तथा दुर्घटना से नारायण के साथ मोटरसाईकिल पर सुभाष भी था।