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annumathur
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जंगल में बहुत चहल पहल थी। जंगल के सभी जानकवर एक जगह एकत्रित हो गए थे। सभी आपस में किसी प्रतियोगिता के बारे में बात कर रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो कोई पर्व मनाया जा रहा हो। तभी स्पीकर से काले कौवे की आवाज आती है, आज छोटू खरगोश और मोटू कछुए के बीच जंगल के इतिहास में दूसरी बार फिर एक बार प्रतियोगिता होने वाली है। किंतु यह कोई साधारण दौड़ प्रतियोगिता नहीं अपितु जंगल के रक्षा विभाग में नौकरी प्राप्त करने के लिए है। इस प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि राजा शेर व हाथी थे। दोनों मैदान के एक किनारे बने मंच पर बैठै थे। सभी दर्शकों का ध्यान मंच की ओर था। दौड़ का समय हो रहा था।
तभी दोनों मैदान में आ गए। मैदान में आते ही सारे दर्शकों का ध्यान दोनों ने अपनी ओर आकर्षित कर लिया। इन दोनों के पूर्वजों के बीच हुयी दौड़ प्रतियोगिता तो विश्व विख्यात है। जिसमें खरगोश जरा सी लापरवाही के कारन साधारण सी प्रतियोगिता में हार गया था। अपने पूर्वज द्वारा की गयी गलती को सुधारने का खरगोश के पास यही सही मौका था। खरगोश अपने पूर्वजों की हार का बदला लेने को आतुर था। वहीं कछुए के मुख्य पर अद्भुत सी मुस्कान थी। इसका कारण किसी को नहीं पता था। दोनों दर्शकों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। दौड़ का समय हो गया था। कौए ने स्पीकर पर मुख्य मेहमान राजा शेर को सिग्नल देने का आग्रह किया। शेर महाशय के सिगनल देने पर दौड़ आरंभ हुई। यह खरगोश के लिए कोई साधारण प्रतियोगिता नहीं थी उसने इसके लिए महीनों से अभ्यास किया था। दिन रात उसे यही बात सताती रहती की कहीं एक बार फिर से ऐसी कोई गलती ना हो जिस कारण वह आज फिर अपने वंश की बदनामी की वजह बने। वह किसी भी कीमत पर हारना नहीं चाहता था।
वहीं कछुआ बिलकुल शांत था मानो उसे कोई फिक्र ही नहीं। जबसे उसे प्रतियोगिता के बारे में पता चला उसने कोई भी ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दी जिससे यह प्रतीत हो की उसे अपनी जीत में कोई कष्ट अथवा संशय हो। कछुआ बिना किसी अभ्यास के ही इस प्रतियोगिता में भाग लेने आ गया था। दौड़ आरंभ हुयी खरगोश और कछुए ने दौड़ना प्रारंभ किया। खरगोश जीतने की चाह में बहुत तेज दौड़ा आधे रास्ते में पहुंच कर उसे थकावट महसूस होने लगी। उसके मन में विश्राम करने का विचार आया पर तभी उसे अपने पूर्वजों की याद आ गयी जो आराम करने के चक्कर में हार गया था। ये बात समझने के बाद उसने ना रुकने का फैसला किया और पहले से भी ज्यादा उत्साह में भागने लगा। वहीं कछुआ बिना किसी परेशानी के अपनी धीमी चाल से चला जा रहा था। आगे की कहानी अगले भाग में दी जायेगी।