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Gyanendra_Soni
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भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम की सहभागिता से भारत की खाद्य सुरक्षा और पोषण पर तैयार की गई 2019 की रिपोर्ट, भारत के कई क्षेत्रों में भुखमरी और कुपोषण की भयावह तस्वीर दिखाती है। इस रिपोर्ट से अनेक नैतिक प्रश्न खड़े हो जाते हैं कि आखिर आर्थिक विकास की गति इतनी तेज होने, गरीबी में कमी आने, निर्यात के लिए अथाह खाद्य सामग्री होने और पोषण पर अनेक सरकारी कार्यक्रम चलाए जाने के बावजूद भी हम कहां खड़े हैं।
रिपोर्ट बाताती है कि पोषण और गरीबी की समस्या पीढ़ी दर चलती चली जाती है। भुखमरी और कुपोषण का शिकार महिलाएं औसत से कम वजन, बौने और दिमागी रूप से कमजोर बच्चों को जन्म देती हैं। ऐसे बच्चे सामान्य मानवीय क्षमता के अनुरूप आउटपुट नहीं दे पाते हैं। इसके चलते वे गरीबी और अवसरों की कमी से आजीवन जूझते रहते हैं।
रिपोर्ट में कोई बात नहीं बताई गई हैं, क्योंकि भारत एक लंबे समय से कुपोषित बच्चों का बोझ लिए चला आ रहा है। यद्यपि 2005-06 से 2015-16 के बीच कुपोषण, कम वजन और रक्ताल्पता के मामलों में कमी आई हैं, परन्तु यह न्यूनतम है।