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pankajgupta1471357
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किसी गांव में दो दोस्त रहते थे, एक का नाम हीरा था और दूसरे का मोती, दोनों में गहरी दोस्ती थी और बचपन से ही खेलना-कूदना, पढ़ना-लिखना हर काम साथ करते आ रहे थे। जब वे बड़े हुए तो उन पर काम धंधा ढूंढने का दबाव आने लगा लोग ताने मारने लगे कि दोनों निठल्ल हैं और एक पैसा भी नहीं कमाते एक दिन दोनों ने विचार विमर्श कर के शहर की ओर जाने का फैसला किया अपने घर से रास्ते का खाना पीना लेकर दोनों भोर होते ही शहर की ओर चल पड़े शहर का रास्ता एक घने जंगल से होकर गुजरता था। दोनों एक साथ अपनी मंजिल की ओर चले जा रहे थे रास्ता लंबा था सो उन्होंने एक पेड़ के नीचे विश्राम करने का फैसला किया दोनों दोस्त विश्राम करने बैठे ही थे कि इतने में एक साधु वहां पर भागता हुआ आया। साधु तेजी से हांस रहा था और बेहद डरा हुआ था। मोती ने साधु से उसके डरने का कारण पूछा साधु ने बताया कि आगे के रास्ते में एक डायन है और उसे हरा कर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है, मेरी मानो तो तुम दोनों यहीं से वापस लौट जाओं इतना कह कर साधु अपने रास्ते को लौट गया। हीरा और मोती साधु की बातों को सुनकर असमंजस में पड़ गए दोनों आगे जाने से डर रहे थे दोनों के मन में घर लौटने जाने का विचार आया, लेकिन लोगों के ताने सुनने के डर से उनहोंने आगे बढ़ने का निश्चय किया।
आगे का रास्ता और भी घना था और वे दोनों बहुत डरे हुए भी थे। कुछ दूर और चलने के बाद उन्हें एक बड़ा सा थैला पड़ा हुआ दिखाई दिया। दोनों दोस्त डरते हुए उस थैले के पास पहुंचे उसके अंदर उन्हें कुछ चमकता हुआ नजर आया। खोल कर देखा तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना ही न रहा, उस थैले में बहुत सारे सोने के सिक्के थे। इतने अधिक थे कि दोनों की जिंदगी आसानी से पूरे ऐश-ओ-आराम से कट सकती थी। दोनों खुशी से झूम रहे थे, उन्हें अपने आगे बढ़ने के फैसले पर गर्व हो रहा था। साथ ही वे उस साधु का मजाक उड़ा रहे थे कि वह कितना मूर्ख था जो आगे जाने से डर गया। अब दोनों ने आपस में धन बांटने का निश्चय किया। दोनों पेड़ के नीचे बैठ गए हीरा ने मोती से कहा कि वह आस-पास के किसी कुएं से पानी लेकर आये, ताकि भोजन आराम से किया जा सके, मोती पानी चल पड़ा। मोती रास्ते में चलते-चलते सोच रहा था कि अगर वो सारे सिक्के उसके हो जाएं तो उसका परिवार हमेशा राजा की तरह रहेगा। मोती के मन में लालच आ चुका था। वह अपने दोस्त को जान से मारने की योजना बनाने लगा। ।