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RajeshBelsare
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कुछ साल पहले जब धूम्रपान और खासतौर पर सिगरेट के कश से होने वाले नुकसानों की फिक्र काफी बढ़ गई तब इसके विकल्प और तल से छुटकारे के लिए इलेक्ट्रॉनिक-सिगरेट यानी ई-सिगरेट का चलन बढ़ा। यह माना गया है कि ई-सिगरेट के सेवन से कोई बड़ा नुकसान नहीं होता और यह धूम्रपान की सामान्य आदत से आजादी का एक कारगर जरिया है। यह भी कहा गया कि पारंपरिक सिगरेटों को ई-सिगरेटों से बदल कर धूम्रपान से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। लेकिन यह स्थिति बहुत दिनों तक नहीं बनी रह सकी। अब नए अध्ययनों में बताया गया है कि ई-सिगरेट भी सामान्य सिगरेट के सेवन या दूसरे तरीके से धूम्रपान की तरह ही सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसके साथ ही दुनिया के कई देशों में ई-सिगरेट पर भी पाबंदी के लिए आवाजें उठीं। इसी के मद्देनजर अब भारत सरकार ने इस संबंध में बुधवार को एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। इस बारे में वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि अब ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, परिवहन, आयात, निर्यात, जमा करने और यहां तक कि वितरण पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इस संबंध में प्रस्तावित अध्यादेश में प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर एक लाख रुपए जुर्माने और एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
दरअसल, पिछले दिनों आई एक खबर में बताया गया कि अमेरिका में कम से कम सात लोगों की मौत के लिए ई-सिगरेट का सेवन जिम्मेदार है। दूसरी ओर, अमेरिका में ही हुए एक अध्ययन के मुताबिक वहां दसवीं और बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों के बीच ई-सिगरेट पीने का चलन करीब अस्सी फीसद बढ़ा है।