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RajeshBelsare
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बादशाह अकबर तब बहुत छोटे थे, जब उनकी मां का देहांत हुआ था। चूंकि वह बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें मां के दूध की दरकार थी। महल में तब एक दासी रहती थी, जिसका शिुश भी दुधमुंहा था। वह नन्हें बादशाह अकबर को दूध पिलाने को राजी हो गई। दासी का वह पुत्र व बादशाह अकबर दोनों साथ-साथ दासी का दूध पीने लगे। दासी के पुत्र का नाम हुसिफ था। चूंकि हुसिफ व बादशाह अकबर ने एक ही स्त्री का दुग्धपान किया था, इसलिए वे दूध-भाई हो गए थे। बादशाह अकबर को भी लगाव था हुसिफ से। समय बीतता रहा। बादशाह अकबर बादशाह बन गए और देश के सर्वाधिक शक्तिशाली सम्राट बने। लेकिन हुसिफ एक मामूली दरबारी तक न बन पाया। उसकी मित्रता जुआरियों के साथ थी और कुछ ऐसे लोग भी उसके साथी थे, जो पैसा फिजूल बहाया करते थे।
एक समय ऐसा आया जब हुसिफ के पास दो समय के भोजन के लिए भी पैसा न था। लोगों ने तब उसे बादशाह के पास जाने को कहा। हुसिफ ने बादशाह अकबर के पास जाने की तैयारी शुरू कर दी। हुसिफ के दरबार में पहुंचते ही बादशाह ने उसे ऐसे गले लगाया जैसे उसका सगा भाई ही हो। लंबे अर्से के बाद हुसिफ को देख बादशाह बेहद खुश थे। उन्होंने उसकी हर संभव सहायता करनी चाही। हुसिफ को बादशाह अकबर ने दरबार में नौकरी दे दी। रहने के लिए बड़ा मकान, नौकर-चाकर, घोड़ागाड़ी भी दी। निजी खर्च के लिए एक मोटी रकम हर महीने उसको मिलती थी। अब हुसिफ की जिंदगी अमन-चैन से गुजर रही थी। उसे किसी चीज की कोई कमी नहीं थी। यदि तुम्हारी कुछ और जरूरतें हो, तो बेहिचक कह डालो। सब पूरी की जाएंगी। बादशाह ने हुसिफ से कहा।
तब हुसिफ ने जवाब दिया, आपने अब तक जितना दिया है वह काफी है शाही जीवन बिताने को, बादशाह सलामत। आपने मुझे इज्जत बख्शी, सर उठाकर चलने की हैसियत दी। मुझसे ज्यादा खुश और कौन होगा। मेरे लिए यह भी फक्र की बात है कि देश का सम्राट मुझे अपना भाई मानता है। और क्या चाहिए हो सकता है मुझे। कहते हुए उसने सिर खुजाया। होंठों पर अहसान भरी मुस्कान थी। लेकिन लगता था उसे कुछ और भी चाहिए था। वह बोला, मैं महसूस करता हूं कि बीरबल जैसे बुद्धिमान व योग्य व्यक्ति के साथ रहूं। मेरी ख्याहिश है कि जैसे बीरबल आपका सलाहकार है, वैसा ही मुझे भी कोई सलाह देने वाला हो।
बादशाह अकबर ने हुसिफ की यह इच्छा भी पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने बीरबल को बुलाकर कहा, हुसिफ मेरे भाई जैसा है। मैंने उसे जीवन के सभी ऐशो-आराम उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन अब वह तुम्हारे जैसा योग्य सलाहकार चाहता है। तुम अपने जैसा बल्कि यह समझो अपने भाई जैसा कोई व्यक्ति लेकर आओ जो हुसिफ का मन बहला सके।