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sunildwivedi
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जब भी रोबोट की बात होती है तो घरघराहट की ध्वनि निकालती धातु से बनी मानवनुमा मशीन की छवि मन में उभरती है। लेकिन इस हार्ड रोबोट से आगे विज्ञान और इंजीनियरिंग के कदम बढ़ चुके हैं। आधुनिक रोबोटिक्स की प्रयोगशाला में अगर आपको मुलायम त्वचा वाली ईल मछली या ऑक्टोपस दिखे तो आप सहसा उन्हें सजीव मानने की भूल मत करियेगा। वे रोबोट हो सकते है। जी हां, धातु से बने हार्ड रोबोट के बाद अब सॉफ्ट रोबोट और इनकी अध्ययन शाखा सॉफ्ट रोबोटिक्स में बहुत तेजी के साथ शोध कार्य चल रहे हैं। सॉफ्ट रोबोटिक्स विज्ञान कथा के सच होने जैसी तकनीक है। साल 2014 में आई डिज्नी सीरिज की फिल्म 'बिग हीरो 6' में एक निर्भीक रोबोट पात्र बेमैक्स को फिल्माया गया था। यह दरअसल एक सॉफ्ट रोबोट की कल्पना थी जिसके स्वास्थ्य सेक्टर में उपयोग को फिल्माया गया था। वहीं 2018 में आई फिल्म स्पाइडरमैन: इनटू दी स्पाइडर-वर्स में डॉक्टर ऑक्टोपस नाम की एक खलनायिका है जिसके स्पर्शकों में सॉफ्ट रोबोट लगे होते है और जिनकी मदद से वह अपने दुश्मनों को वश में करती है। रजतपट की यह कल्पना अब हकीकत में बदल रही है और सॉफ्ट रोबोटिक्स हमारे जीवन की नई इबारत लिखने वाली तकनीक बनती जा रही है। परंपरागत हार्ड रोबोट, अंडे और फल को पकड़ते समय उन्हें नष्ट कर सकते हैं। वहीं सॉफ्ट रोबोट हमारे हाथ की मांसपेशियों जैसे मुलायम होते है और मानवीय अंगों जितने लचीले भी। सॉफ्ट रोबोट सामान्य तौर पर तरल पदार्थ, जेल और इलास्टोमर से बनाए जाते हैं जिन्हें किसी भी आकृति में ढाला जा सकता है। जिस प्रकार ऑक्टोपस एक संकरी दरार से धीरे-धीरे अपने लचीले शरीर को सिकोड़ते हुए बाहर निकाल लेता है या कैंटरपिलर असमतल भूमि पर भी आसानी से रोल करता हुआ चलता है, उसी तरह ये सॉफ्ट रोबोट भी लचीले और हल्के वजन के होते हैं तथा किसी भी जैवीय संरचना में अपने को ढालने की क्षमता रखते हैं।